सुप्रीम कोर्ट ने नए वक्फ कानून के तहत नियुक्तियों पर लगाई रोक.केंद्र से 7 दिन में जवाब तलब
संवाददाता
17 April 2025
अपडेटेड: 11:21 AM 0thGMT+0530

नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2025: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 के तहत वक्फ बोर्डों में होने वाली नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इसके साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगले आदेश तक वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाए। इस मामले में केंद्र सरकार को सात दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला नए वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को असंवैधानिक और अल्पसंख्यक समुदाय के हितों के खिलाफ बताया है।
मामले की पृष्ठभूमि
वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को संसद में पेश किए जाने के बाद से ही यह विवादों के घेरे में रहा है। इस विधेयक में वक्फ बोर्डों के प्रशासन, संपत्तियों के प्रबंधन और नियुक्तियों से संबंधित कई बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कानून वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता को कमजोर करता है और अल्पसंख्यक समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण करता है। इसके अलावा, विधेयक में संपत्तियों को डी-नोटिफाई करने और गैर-मुस्लिम व्यक्तियों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने जैसे प्रावधानों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इन आपत्तियों को लेकर कई संगठनों और व्यक्तियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिकाओं में मांग की गई कि इस कानून को लागू करने पर रोक लगाई जाए और इसे असंवैधानिक घोषित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और केंद्र सरकार दोनों पक्षों के तर्क सुने। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने तर्क दिया कि नए कानून के प्रावधान वक्फ बोर्डों के मूल उद्देश्य को कमजोर करते हैं और इससे संपत्तियों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिना व्यापक विचार-विमर्श के इस तरह के बदलाव लागू करना संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि विधेयक का उद्देश्य वक्फ बोर्डों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना था कि प्रस्तावित बदलाव वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और उनके दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी हैं। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र के तर्कों को आंशिक रूप से सुनने के बाद कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कोई अपरिवर्तनीय कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।
कोर्ट का अंतरिम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक निम्नलिखित कदमों पर रोक रहेगी:
नियुक्तियों पर रोक: वक्फ बोर्डों में नए कानून के तहत कोई भी नई नियुक्ति नहीं की जाएगी।
संपत्तियों की स्थिति यथावत: वक्फ संपत्तियों को डी-नोटिफाई करने या उनकी स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव करने पर रोक रहेगी।
केंद्र को जवाब का आदेश: केंद्र सरकार को सात दिनों के भीतर इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगा ताकि जल्द से जल्द इसका निपटारा हो सके। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि वक्फ संपत्तियों का धार्मिक और सामाजिक महत्व है, और इसलिए उनकी मौजूदा स्थिति को बनाए रखना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रिया
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। कई संगठनों ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। एक याचिकाकर्ता ने कहा, “यह फैसला वक्फ बोर्डों की स्वायत्तता और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। हम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार करेंगे।”
आगे की राह
सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश नए वक्फ कानून के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। केंद्र सरकार अब सात दिनों के भीतर अपना जवाब तैयार कर रही है, जिसमें वह विधेयक के प्रावधानों का बचाव करने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता भी कोर्ट में अपने तर्कों को और मजबूत करने की तैयारी में जुट गए हैं।
यह मामला न केवल वक्फ बोर्डों के प्रशासन से जुड़ा है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, अल्पसंख्यक अधिकारों और संवैधानिक सिद्धांतों के व्यापक मुद्दों को भी छूता है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल वक्फ बोर्डों के लिए बल्कि देश के सामाजिक और धार्मिक ताने-बाने के लिए भी दूरगामी परिणाम ला सकता है।