सुप्रीम कोर्ट में निशिकांत दुबे के खिलाफ याचिका

khabar pradhan

संवाददाता

22 April 2025

अपडेटेड: 12:32 PM 0ndGMT+0530

CJI पर विवादास्पद बयान के मामले में अगले हफ्ते सुनवाई, वीडियो हटाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ दायर याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने का फैसला किया है। दुबे ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना पर विवादास्पद टिप्पणी की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि “देश में गृह युद्ध भड़काने के लिए सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है।” इस बयान के बाद उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने दुबे के बयान से संबंधित वीडियो और सामग्री को सोशल मीडिया से हटाने की भी मांग की है।
मामले का विवरण
निशिकांत दुबे ने 19 अप्रैल 2025 को एक सार्वजनिक मंच पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि “सुप्रीम कोर्ट अपनी सीमा से बाहर जा रहा है। अगर हर बात के लिए सुप्रीम कोर्ट जाना है, तो संसद और विधानसभा का कोई मतलब नहीं।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसले देश में धार्मिक युद्ध भड़काने का कारण बन सकते हैं। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद कई संगठनों और व्यक्तियों ने इसे न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ बताया।
याचिकाकर्ता, एक गैर-सरकारी संगठन और कुछ वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दुबे के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की। याचिका में कहा गया है कि दुबे का बयान न केवल सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है, बल्कि यह जनता के बीच न्यायपालिका के प्रति अविश्वास पैदा करने वाला भी है। याचिकाकर्ता ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
जस्टिस बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अगले हफ्ते सुनवाई का आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के बयान न्यायपालिका की स्वतंत्रता और गरिमा को चुनौती देते हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए उनकी मंजूरी की आवश्यकता नहीं है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मामला गंभीर दिशा में बढ़ सकता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मांग पर विचार करते हुए दुबे से उनके बयान से संबंधित वीडियो और सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए जवाब मांगा है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने दुबे के बयान की कड़ी निंदा की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X पर लिखा, “निशिकांत दुबे का बयान सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ सीधा हमला है। यह संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है।” दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस बयान को अलोकतांत्रिक करार दिया।
दूसरी ओर, कुछ भाजपा नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है, जबकि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और सरकार का इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं है। X पर कई यूजर्स ने कोर्ट के रुख का समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश के रूप में देखा। एक यूजर ने लिखा, “न्यायपालिका की आलोचना करना अपराध नहीं होना चाहिए,” जबकि दूसरे ने कहा, “सांसद को अपनी मर्यादा में रहकर बोलना चाहिए।”
पहले भी विवादों में रहे हैं दुबे
निशिकांत दुबे इससे पहले भी अपने बयानों के कारण विवादों में रह चुके हैं। 2021 में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान सरकारी प्रबंधन पर सवाल उठाने वाले दैनिक भास्कर के खिलाफ टिप्पणी की थी, जिसके बाद आयकर विभाग ने भास्कर समूह के कार्यालयों पर छापेमारी की थी। उस समय भी विपक्ष ने इसे मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला बताया था।
आगे की कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगले हफ्ते विस्तृत सुनवाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता और दुबे दोनों पक्षों को अपने तर्क तैयार करने का निर्देश दिया है। यदि दुबे कोर्ट के निर्देशों का पालन करने में विफल रहते हैं या उनके खिलाफ अवमानना सिद्ध होती है, तो उन्हें जुर्माना या अन्य दंड का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, कोर्ट इस मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी निर्देश दे सकता है कि वे दुबे के बयान से संबंधित सामग्री को हटाएं।
निष्कर्ष
यह मामला विधायिका और न्यायपालिका के बीच संतुलन के सवाल को फिर से उठाता है। निशिकांत दुबे का बयान और उस पर सुप्रीम कोर्ट की त्वरित प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि न्यायपालिका अपनी स्वतंत्रता और गरिमा को लेकर बेहद संवेदनशील है। इस मामले का परिणाम न केवल दुबे के लिए, बल्कि भविष्य में सार्वजनिक हस्तियों के बयानों पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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