सुप्रीम कोर्ट से पूर्व IPS संजीव भट्ट को झटका
संवाददाता
29 April 2025
अपडेटेड: 9:05 AM 0thGMT+0530
1990 कस्टोडियल डेथ मामले में जमानत याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 29 अप्रैल 2025 को गुजरात के पूर्व IPS अधिकारी संजीव भट्ट की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। यह मामला 1990 में जमनगर, गुजरात में पुलिस हिरासत में एक युवक, प्रभुदास वैष्णानी की मौत से जुड़ा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने भट्ट की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित करने की मांग भी ठुकरा दी, हालांकि उनकी अपील की सुनवाई जल्द करने का निर्देश दिया।1990 में, संजीव भट्ट जमनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थे। दंगों के दौरान हिरासत में लिए गए वैष्णानी की कथित तौर पर पुलिस यातना के बाद मृत्यु हो गई थी। इस मामले में 2019 में निचली अदालत ने भट्ट को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। 2024 में गुजरात हाईकोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज कर दी, जिसके बाद भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत और सजा निलंबन की मांग की।भट्ट के वकीलों ने दलील दी कि निचली अदालतों में सुनवाई निष्पक्ष नहीं थी और लंबित अपील के दौरान जमानत दी जानी चाहिए। वहीं, सरकारी वकील ने गंभीर आरोपों का हवाला देकर इसका विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत से इनकार कर दिया, लेकिन मामले की सुनवाई को प्राथमिकता देने का आदेश दिया।यह फैसला भट्ट के लिए बड़ा झटका है, जिनका 1996 के ड्रग प्लांटिंग मामले में भी 20 साल की सजा का एक और केस चल रहा है। सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर बहस छिड़ी है। कुछ लोग इसे कानून का पालन मानते हैं, जबकि अन्य इसे भट्ट के खिलाफ राजनीतिक साजिश का हिस्सा बता रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय कस्टोडियल डेथ जैसे संवेदनशील मामलों में जवाबदेही को रेखांकित करता है।