स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत –गिरफ्तारी पर लगी रोक:

khabar pradhan

संवाददाता

27 February 2026

अपडेटेड: 6:20 PM 0thGMT+0530

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत –गिरफ्तारी पर लगी रोक:

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के लिए और उनके समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर है। स्वामी के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई की। हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।  फिलहाल फैसला आने तक गिरफ्तारी नहीं होगी।  इस तरह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को थोड़े समय के लिए राहत मिल गई है।फैसला आते ही कोर्ट परिसर में तालियां बजने लगीं।‌अब  स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, और अपनी बात रखेंगे।‌

कुंभ और माघ मेले में उनके खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया गया।‌ अदालत में एफआईआर पढ़ी गई।‌ राज्य सरकार के वकीलों ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया।‌
शंकराचार्य के वकील ने क्या कहा:

शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। वकील ने कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। अगर ऐसा है तो नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया।
कोर्ट ने क्या कहा:
इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं।‌ शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है।  पालकी पर स्नान करने के लिए जाते समय शंकराचार्य और उनके शिष्यों को प्रशासन ने भीड़ अधिक होने पर और भगदड़ की आशंका पर घाट से पहले ही रोक दिया। शंकाराचार्य ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बटुकों को चोटी पकड़कर घसीटा और उनकी पिटाई की…साथ ही साथ शंकराचार्य और उनके शिष्यों का भी अपमान किया। इसके विरोध में शंकराचार्य त्रिवेणी मार्ग पर अपने शिविर के सामने धरने पर बैठ गए जहां पर उन्हें पुलिस वाले छोड़कर गए थे। 11 दिन तक धरना चला। शंकराचार्य की मांग थी कि अधिकारी आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांग लें तो वह अपने टेक समाप्त कर देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहने पर भी जब को हल नहीं निकला तब शंकराचार्य ने 28 जनवरी को माघ मेला छोड़ दिया और काशी के लिए रवाना हो गए..उसके बाद विवाद शांत नहीं हुआ उन पर पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआऱ हुई …औऱ केस चला।
फिलहाल थोड़ी राहत मिली है..

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