हर्षा रिछारिया की वृंदावन से संभल पदयात्रा में मुस्लिम युवती शामिल

khabar pradhan

संवाददाता

14 April 2025

अपडेटेड: 7:36 AM 0thGMT+0530

माथे पर लगवाया टीका, बोली- ‘वहाँ सम्मान नहीं, हर्षा की चप्पल गायब, नंगे पैर चलीं

मथुरा के पवित्र शहर वृंदावन से सनातनी कार्यकर्ता हर्षा रिछारिया ने 14 अप्रैल, 2025 को संभल तक की अपनी पदयात्रा शुरू की। इस यात्रा का उद्देश्य युवाओं को सनातन धर्म के प्रति जागरूक करना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना है। यात्रा के शुरुआती दिन एक मुस्लिम युवती के शामिल होने और हर्षा की चप्पल गायब होने की घटनाओं ने सभी का ध्यान खींचा।
मुस्लिम युवती का यात्रा में शामिल होना
हर्षा रिछारिया, जो पहले मॉडल और इन्फ्लुएंसर रह चुकी हैं, अब सनातन धर्म के प्रचार और सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। उनकी यह पदयात्रा वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से शुरू हुई, जहाँ उन्होंने भगवान शिव और श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की। यात्रा के पहले दिन एक मुस्लिम युवती उनके समूह में शामिल हुई। इस युवती ने बताया कि उसने हर्षा की यात्रा के बारे में समाचारों में सुना और उनके संदेश से प्रभावित होकर उनसे मिलने आई।
युवती ने हर्षा के साथ बातचीत में कहा, “मैं अपने समुदाय में सम्मान और स्वतंत्रता की कमी महसूस करती थी। यहाँ मुझे एक नई प्रेरणा मिली है।” उसने स्वेच्छा से अपने माथे पर टीका लगवाया, जिसे हर्षा ने एकता और विश्वास का प्रतीक बताया। इस पल ने यात्रा में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। हर्षा ने युवती का हौसला बढ़ाया और उसे अपने साथ चलने के लिए प्रोत्साहित किया।
चप्पल गायब, नंगे पैर चलीं हर्षा
यात्रा के दौरान एक और घटना ने सबका ध्यान खींचा। वृंदावन के आसपास एक जगह रुकने पर हर्षा ने अपनी चप्पलें उतारीं। जब वह आगे बढ़ने के लिए तैयार हुईं, तो उनकी चप्पलें वहाँ नहीं थीं। आसपास के लोगों ने खोजने की कोशिश की, लेकिन चप्पलें नहीं मिलीं। इसके बावजूद, हर्षा ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने कहा, “यह यात्रा मेरे लिए एक संकल्प है। चप्पलें तो फिर मिल जाएँगी, लेकिन मेरा लक्ष्य रुकना नहीं चाहिए।”
इसके बाद हर्षा नंगे पैर ही अपनी यात्रा पर निकल पड़ीं। उनके इस समर्पण ने उनके साथ चल रहे लोगों में जोश भर दिया। कुछ देर बाद स्थानीय लोगों ने उनकी इस भावना से प्रभावित होकर उन्हें नई चप्पलें भेंट कीं, लेकिन तब तक हर्षा कई किलोमीटर नंगे पैर चल चुकी थीं।
पदयात्रा का उद्देश्य और संदेश
हर्षा रिछारिया की यह पदयात्रा ‘सनातन युवा जोड़ो’ अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत वह वृंदावन से संभल तक लगभग 175 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करेंगी। इस यात्रा का मकसद युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ना, धर्मांतरण के खिलाफ जागरूकता फैलाना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। हर्षा का कहना है, “हमारा उद्देश्य किसी के खिलाफ नहीं है। हम चाहते हैं कि लोग अपनी जड़ों से जुड़ें और एक-दूसरे का सम्मान करें।”
वह अपनी यात्रा में गाँव-गाँव जाकर लोगों से मिल रही हैं, उनकी समस्याएँ सुन रही हैं और सनातन धर्म के मूल्यों को सरल शब्दों में समझा रही हैं। उनकी यह पहल खासकर युवाओं में जोश पैदा कर रही है।
सामाजिक और स्थानीय प्रतिक्रिया
मुस्लिम युवती के शामिल होने की खबर ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियाँ बटोरीं। कई लोगों ने इसे सामाजिक एकता का प्रेरक उदाहरण बताया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हर्षा जी की यात्रा हमें एकजुट होने की प्रेरणा देती है। उनकी सादगी और समर्पण देखकर मन खुश हो जाता है।”
हालांकि, कुछ लोग इस यात्रा को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं। उनका मानना है कि इस तरह की गतिविधियाँ सामुदायिक तनाव को बढ़ा सकती हैं। जवाब में हर्षा और उनके समर्थकों ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का मकसद केवल जागरूकता और एकता है, न कि किसी समुदाय को निशाना बनाना।
यात्रा का रास्ता और भविष्य
हर्षा की यह पदयात्रा 8 दिनों तक चलेगी, जिसमें वह मथुरा, आगरा और अन्य इलाकों से गुजरते हुए संभल पहुँचेंगी। उनके साथ कई युवा और समर्थक चल रहे हैं, जो उनके संदेश को और लोगों तक पहुँचाने में मदद कर रहे हैं। यात्रा शुरू होने से पहले वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर और अन्य पवित्र स्थानों पर पूजा-अर्चना की गई, जिसने इस अभियान को और खास बना दिया।
हर्षा रिछारिया, जो हाल ही में प्रयागराज महाकुंभ में अपनी सादगी और संदेशों के कारण चर्चा में थीं, अब इस यात्रा के जरिए एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रही हैं। उनकी यह पहल न केवल सनातन धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ा रही है, बल्कि सामाजिक एकता और समर्पण का संदेश भी दे रही है।

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