1 अप्रैल से इंटरनेट वाले चीनी CCTV कैमरों पर लगा प्रतिबंध, सुरक्षा के लिए भारत सरकार का बड़ा फैसला

khabar pradhan

संवाददाता

31 March 2026

अपडेटेड: 2:47 PM 0stGMT+0530


31 मार्च 2026
नई दिल्ली:

भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल से देश में चीनी मूल के उन सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की बिक्री पर रोक लगा दी गई है जो इंटरनेट से जुड़ते हैं। अब बिना सरकारी प्रमाणन (Certification) और कड़े मानकों को पूरा किए कोई भी विदेशी कंपनी अपने निगरानी उपकरण भारत में नहीं बेच पाएगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का मानना है कि सीसीटीवी कैमरे हमारे देश के महत्वपूर्ण ढांचे (एयरपोर्ट, सरकारी भवन और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क) की निगरानी करते हैं। ऐसे में चीनी तकनीकों के इस्तेमाल से कई बड़े खतरे हो सकते हैं:
* डेटा लीक: संवेदनशील जानकारी चोरी होने का डर।
* बैकडोर एक्सेस: कैमरों में छिपे सॉफ्टवेयर के जरिए विदेशों से कंट्रोल किए जाने का खतरा।
* रिमोट कंट्रोल: इंटरनेट से जुड़े कैमरों को दूर बैठे दुश्मन देशों द्वारा ऑपरेट किए जाने की आशंका।
इन बड़ी कंपनियों पर गिरेगी गाज

नए नियमों के लागू होने से हिकविज़न (Hikvision) और दाहुआ (Dahua) जैसी दिग्गज चीनी कंपनियों की भारतीय बाजार में मुश्किलें बढ़ जाएंगी। अब कंपनियों को अपने प्रॉडक्ट के ‘सिस्टम-ऑन-चिप’ (SoC) जैसे जरूरी पार्ट्स की पूरी जानकारी देनी होगी और मान्यता प्राप्त लैब में जांच करानी होगी। राहत की बात यह है कि अब तक करीब 507 मॉडलों को मंजूरी दी जा चुकी है जो कड़े मानकों पर खरे उतरे हैं।

चीनी कंपनियों का घटता दबदबा
भारत का सीसीटीवी मार्केट करीब 41,000 से 62,000 करोड़ रुपये का है।
मार्केट के एक-तिहाई हिस्से पर चीनी कंपनियों का कब्जा था।
भारतीय (घरेलू) कंपनियां तेजी से आगे बढ़ी हैं और फरवरी 2026 तक बाजार के 80% हिस्से पर कब्जा कर चुकी हैं।

सरकार की ‘ट्रस्टेड वेंडर’ नीति के कारण अब चीनी तकनीक पर निर्भरता कम होगी। जानकारों का मानना है कि:
शुरुआत में कैमरों की सप्लाई में थोड़ी कमी आ सकती है।
डिमांड के मुकाबले सप्लाई कम होने से कीमतों में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है।
भारतीय कंपनियों को अपना व्यापार बढ़ाने का एक शानदार मौका मिलेगा।

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