10 साल के बच्चे भी अब खोल सकेंगे खुद का बैंक अकाउंट – RBI का ऐतिहासिक फैसला…

khabar pradhan

संवाददाता

19 May 2025

अपडेटेड: 9:19 AM 0thGMT+0530

10 साल के बच्चे भी अब खोल सकेंगे खुद का बैंक अकाउंट – RBI का ऐतिहासिक फैसला…

10 साल के बच्चे भी अब खोल सकेंगे खुद का बैंक अकाउंट – RBI का ऐतिहासिक फैसला

बचपन से ही वित्तीय साक्षरता की दिशा में बड़ा कदम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम फैसला लेते हुए 10 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों को बिना गार्जियन की मदद के अपना बैंक खाता खोलने की अनुमति दे दी है। यह कदम बच्चों को आर्थिक रूप से सशक्त और जिम्मेदार बनाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक बच्चों के खाते केवल उनके माता-पिता या अभिभावकों की निगरानी में ही खोले जाते थे, लेकिन नए नियम के तहत बच्चे खुद भी अपने फाइनेंशियल फैसले लेने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
बचपन से ही सेविंग्स की आदत, पैसे की अहमियत और जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के लिए यह फैसला मील का पत्थर साबित हो सकता है। बच्चों को गुल्लक से निकाल कर बैंक की दुनिया में लाने का यह एक व्यावहारिक और सकारात्मक प्रयास है।

10 साल की उम्र से खुलेगा बैंक अकाउंट, पर रहेगी निगरानी
RBI के नए नियमों के अनुसार, 10 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी बच्चा अब स्वतंत्र रूप से बचत खाता (Savings Account) खोल सकता है। हालांकि, बैंक ऐसे खातों पर विशेष निगरानी रखेंगे और सीमित लेनदेन की अनुमति दी जाएगी।
हर बैंक अपने-अपने दिशानिर्देशों के अनुसार बच्चे के लिए KYC (Know Your Customer) प्रक्रिया को सरल बनाएगा और खातों में डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग जैसी सुविधाएं सीमित रूप से दी जाएंगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई फाइनेंशियल फ्रॉड न हो और बच्चे का अनुभव सुरक्षित रहे।
बैंकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इन खातों में सीमित मासिक लेनदेन सीमा निर्धारित करें। उदाहरण के लिए, कुछ बैंक बच्चों के खातों में ₹10,000 से ₹25,000 तक की मासिक सीमा तय कर सकते हैं।

बच्चों के लिए क्या हैं फायदे?

  1. सेविंग्स की आदत: बच्चे जब खुद अपने बैंक अकाउंट को ऑपरेट करेंगे, तो उन्हें पैसे की कीमत समझ में आएगी और वे फिजूलखर्ची से बचना सीखेंगे।
  2. फाइनेंशियल लिटरेसी: बैंकिंग सिस्टम, डिपॉजिट, ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे टर्म्स से परिचय होने लगेगा।
  3. जिम्मेदारी का विकास: अपने पैसों को ट्रैक करना, खर्च की योजना बनाना – यह सब जिम्मेदारी के भाव को बढ़ाएगा।
  4. डिजिटल अवेयरनेस: सीमित इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग की सुविधाएं मिलने से डिजिटल लेन-देन की भी समझ विकसित होगी।

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