20 मई को वक्फ कानून पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, केंद्र और याचिकाकर्ताओं से मांगा हलफनामा…
संवाददाता
15 May 2025
अपडेटेड: 11:42 AM 0thGMT+0530
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि नए वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अब 20 मई को सुनवाई होगी. न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति एजी मसीह की पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार और याचिकाकर्ता 19 मई तक अपना हलफनामा दाखिल करें. यह मामला पहले 5 मई को सूचीबद्ध था, लेकिन सुनवाई टल गई थी. अब नई पीठ – जिसमें CJI बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल हैं – इस संवेदनशील मुद्दे की सुनवाई करेगी.
अंतरिम राहत पर 20 मई को होगी चर्चा
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अंतरिम राहत दिए जाने के मुद्दे पर विचार 20 मई को किया जाएगा. केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता, जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन, अभिषेक मनु सिंघवी और सीयू सिंह ने दलीलें पेश कीं. सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर न्यायालय को पूरी तरह विचार करने के लिए कुछ और समय दिया जाना चाहिए. इस पर बेंच ने सहमति जताते हुए कहा कि अंतिम निर्णय फिलहाल नहीं लिया जाएगा.
कानून के अहम प्रावधानों पर फिलहाल यथास्थिति
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया है कि जब तक शीर्ष अदालत मामले की सुनवाई कर रही है, तब तक वक्फ कानून के अहम प्रावधान लागू नहीं किए जाएंगे. 25 अप्रैल को दायर 1332 पन्नों के हलफनामे में केंद्र ने दावा किया कि यह कानून पूरी तरह संवैधानिक है और संसद द्वारा पारित किया गया है, इसलिए इसे रोका नहीं जाना चाहिए.
सरकार ने यह भी कहा कि 2013 के बाद से वक्फ संपत्तियों में 20 लाख एकड़ से ज्यादा की वृद्धि हुई है, जिससे निजी और सरकारी जमीनों पर विवाद बढ़े हैं. हालांकि, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इन आंकड़ों को गलत बताया और कोर्ट में झूठा हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
70 से अधिक याचिकाएं दाखिल, केवल पांच पर होगी सुनवाई
वक्फ कानून के खिलाफ अब तक सुप्रीम कोर्ट में 70 से अधिक याचिकाएं दाखिल की जा चुकी हैं, लेकिन अदालत केवल पांच मुख्य याचिकाओं पर सुनवाई करेगी. इन याचिकाओं में AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी की याचिका भी शामिल है. नया वक्फ कानून अप्रैल में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रभावी हुआ था. लोकसभा में 288 और राज्यसभा में 128 सांसदों ने इसका समर्थन किया था, हालांकि कई विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.
17 अप्रैल को हुई एक पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल मेहता ने तर्क दिया था कि यह कानून उचित विचार-विमर्श के बाद पारित हुआ है और जब तक सरकार का पक्ष नहीं सुना जाता, तब तक उस पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि कई उदाहरण ऐसे हैं जहां गांवों और निजी संपत्तियों को वक्फ घोषित कर विवाद उत्पन्न किया गया.
अब सबकी नजर 20 मई की सुनवाई पर टिकी है, जब अदालत यह तय करेगी कि अंतरिम राहत दी जाए या नहीं, और आगे की प्रक्रिया कैसे चलेगी.