2025 में बगलामुखी जयंती कब है ? बगलामुखी जयंती 2025 का तिथि…

khabar pradhan

संवाददाता

5 May 2025

अपडेटेड: 11:10 AM 0thGMT+0530

2025 में बगलामुखी जयंती कब है ? बगलामुखी जयंती 2025 का तिथि…

उदया तिथि की मान्यता के अनुसार बगलामुखी जयंती 5 मई को मनाई जाएगी। इस दिन मासिक दुर्गा अष्टमी है और सीता नवमी है यानी आज के दिन ही सीता जी का जन्म हुआ था ।इस दिन 5 मई सोमवार को यह दुर्लभ संयोग बन रहा है।बगलामुखी माता जयंती 2025: हिंदू धर्म की दस महाविद्याओं में शामिल देवी बगलामुखी की जयंती इस वर्ष 5 मई, सोमवार को मनाई जाएगी। बगलामुखी माता, दस महाविद्यओं में से आठवीं महाविद्या है और इसे देवी पार्वती का एक उग्र स्वरूप माना जाता है। बगलामुखी माता को शत्रुओं का नाश करने वाली और वाक सिद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है ।(1)बगलामुखी का एक छोटा मंत्र है: “ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।” यह मंत्र माँ बगलामुखी को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए है ।(2) मां बगलामुखी को प्रसन्न करने के विशेष मंत्र – ——————————————————-‘ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा। ‘ : हल्दी की माला से इस मंत्र का जप करें । : रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करें.(3)मां बगलामुखी के इन मंत्रों के जप से दूर हो जाती हैं सभी समस्याएं — ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम:। इस मंत्र को मां का विशेष मंत्र माना जाता है। मां के इस मंत्र का जप करने से मां प्रसन्न होती हैं और सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं।*(4)माँ बगलामुखी का दिव्य मन्त्र* “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं …(5)— *माँ बगलामुखी का दिव्य मन्त्र* “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।” यह मन्त्र माँ बगलामुखी की अपार शक्ति का प्रतीक है। जब हम इसे पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ जपते हैं, तो यह हमारे जीव…बगलामुखी माता किसका अवतार है?——————————————-बगलामुखी माता, दस महाविद्यओं में से आठवीं महाविद्या है और इसे देवी पार्वती का एक उग्र स्वरूप माना जाता है। बगलामुखी माता को शत्रुओं का नाश करने वाली और वाक सिद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। … यह भगवती पार्वती का उग्र स्वरूप है। … व्यष्ठि रूप में शत्रुओ को नष्ट करने की इच्छा रखने वाली तथा समिष्टि रूप में परमात्मा की संहार शक्ति ही बगला है। पिताम्बराविद्या के.. दंतकथा सत्य युग (हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में पहला युग) में, एक महान तूफान ने सृष्टि को नष्ट करना शुरू कर दिया। भगवान विष्णु परेशान हो गए और उन्होंने हल्दी की झील, हरिद्रा सरोवर के तट पर देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की।…मां बगलामुखी के अन्य नाम• ॐ बगलायै नमः• ॐ विष्णुवनितायै नमः• ॐ विष्णुशङ्करभामिन्यै नमः• ॐ बहुलायै नमः• ॐ वेदमात्रे नमः• ॐ महाविष्णुप्रस्वै नमः• ॐ महामत्स्यायै नमः• ॐ महाकूर्मायै नमः• ॐ शुभ्रायै नमः• ॐ श्वेतायै नमः• ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः• ॐ सुन्दर्यै नमः• ॐ सौभगायै नमः• ॐ सौम्यायै नमः• ॐ स्वर्णभायै नमः• ॐ स्वर्गतिप्रदायै नमः• ॐ रिपुत्रासकर्यै नमः• ॐ रेखायै नमः• ॐ शत्रुसंहारकारिण्यै नमः• ॐ भामिन्यै नमः• ॐ मायायै नमः• ॐ स्तम्भिन्यै नमः• ॐ मोहिन्यै नमः• ॐ शुभायै नमः• ॐ रागद्वेषकर्यै नमः• ॐ रात्र्यै नमः• ॐ रौरवध्वंसकारिणयै नमः• ॐ यक्षिण्यै नमः• ॐ सिद्धनिवहायै नमः• ॐ सिद्धेशायै नमः• ॐ सिद्धिरूपिण्यै नमः• ॐ लङ्कापतिध्वंसकर्यै नमः• ॐ लङ्केशरिपुवन्दितायै नमः• ॐ लङ्कानाथकुलहरायै नमः• ॐ महारावणहारिण्यै नमः• ॐ देवदानवसिद्धोघपूजितायै नमः• ॐ परमेश्वर्यै नमः• ॐ पराणुरूपायै नमः• ॐ परमायै नमः• ॐ परतन्त्रविनाशिन्यै नमः• ॐ वरदायै नमः• ॐ वरदाराध्यायै नमः• ॐ वरदानपरायणायै नमः• ॐ वरदेशप्रियायै नमः• ॐ वीरायै नमः• ॐ वीरभूषणभूषितायै नमः• ॐ वसुदायै नमः• ॐ बहुदायै नमः• ॐ वाण्यै नमः• ॐ ब्रह्मरूपायै नमः• ॐ वराननायै नमः• ॐ बलदायै नमःबगलामुखी माता की कहानी, एक प्राचीन कथा है जो शक्ति के रूप में उनकी महिमा और भक्तों की रक्षा करने की उनकी क्षमता को दर्शाती है। यह कहानी मुख्य रूप से सतयुग में एक भयंकर ब्रह्मांडीय तूफान के बारे में है, जिसे भगवान विष्णु ने देवी बगलामुखी को प्रसन्न करके शांत किया था। विस्तार से:• सतयुग का ब्रह्मांडीय तूफान:सतयुग में, एक भयंकर तूफान ने सृष्टि को नष्ट करना शुरू कर दिया था। इससे चिंतित होकर, भगवान विष्णु ने देवी शक्ति को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। • देवी बगलामुखी का अवतरण:भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर, देवी शक्ति हरिद्रा सरोवर में बगलामुखी के रूप में प्रकट हुईं। • तूफान का शांत होना:बगलामुखी ने अपने शक्ति से ब्रह्मांडीय तूफान को शांत किया और सृष्टि को विनाश से बचाया। • बगलामुखी का महत्व:इस घटना के बाद, बगलामुखी को शक्ति और संरक्षण का प्रतीक माना जाने लगा। उन्हें शत्रुनाशिनी भी कहा जाता है, क्योंकि वे शत्रुओं को पराजित करने और भक्तों को सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम हैं। अन्य कथाएं:• एक अन्य कथा के अनुसार, एक राक्षस ने वाक-सिद्धि प्राप्त की थी और इसका दुरुपयोग करके लोगों को परेशान कर रहा था। देवी बगलामुखी ने राक्षस की जीभ पकड़कर उसकी शक्ति को स्थिर कर दिया और फिर उसे वरदान दिया। • कुछ लोग मानते हैं कि रावण ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए भी देवी बगलामुखी की पूजा की थी। देवी बगलामुखी की कहानी एक शक्तिशाली और प्रेरणादायक कहानी है जो शक्ति, संरक्षण और देवी की भक्तों के प्रति प्रेम को दर्शाती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जब हम संकट में होते हैं, तो हमें देवी शक्ति की शरण में जाना चाहिए और उनसे प्रार्थना करनी चाहिएसती का बायां वक्ष इस स्थान पर गिरा, जिससे यह एक शक्ति पीठ बन गया।मां बगलामुखी अनुष्ठान मुख्य रूप से मां बगलामुखी की पूजा और साधना का एक विशिष्ट विधि है, जो शत्रुओं पर विजय, धन लाभ और अन्य मनोरथों की प्राप्ति के लिए किया जाता है. इस अनुष्ठान में मंत्र जाप, हवन, पूजा और आरती शामिल होते हैं. मां बगलामुखी अनुष्ठान की प्रक्रिया:• 1. पूर्वांग कर्म:अनुष्ठान की शुरुआत में गणेश पूजन, मातृपूजन, कलश स्थापना, रक्षा विधान आदि किए जाते हैं. • 2. मंत्र जाप:मां बगलामुखी का विशिष्ट मंत्र “ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वाना दुष्टं वाचं मुखं पदं स्तम्भय। जिव्हां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा” का 125,000 बार जाप किया जाता है. • 3. हवन:हवन में तिल, चावल, दूध, चंपा के पुष्प आदि का प्रयोग किया जाता है. • 4. आरती और पूजा:मां बगलामुखी की आरती उतारी जाती है और पूजा की जाती है. • 5. अन्य गतिविधियां:अष्टोत्तर नामावली पाठ, बगलामुखी स्तोत्र पाठ, और माता के समक्ष धूप, दीप और अगरबत्ती जलाना शामिल होता है. अनुष्ठान के लाभ:• शत्रुओं पर विजय• धन और व्यापार में वृद्धि• संतान प्राप्ति• कोर्ट केस में सफलता• विवाह बाधा निवारण• तंत्र बाधा से मुक्ति अन्य महत्वपूर्ण बातें:• अनुष्ठान के दौरान पीले वस्त्र धारण करने और पीले रंग के फूल, चंदन आदि का उपयोग करने की सलाह दी जाती है.• साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना आवश्यक है.• अनुष्ठान एकांत और शांत स्थान पर करना चाहिए.• किसी अनुभवी गुरु या जानकार के मार्गदर्शन में अनुष्ठान करना बेहतर होता है. बगलामुखी जयंती:मां बगलामुखी की जयंती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस दिन माता की पूजा करने और अनुष्ठान करने का विशेष महत्व होता है.मां बगलामुखी का बीज मंत्र है “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।” विस्तार से:• “ॐ” (Om):यह एक पवित्र प्रतीक है और सभी मंत्रों में शुरुआत में उपयोग किया जाता है।• “ह्लीं” (Hleem):यह बगलामुखी देवी का बीज मंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।• “बगलामुखी”:देवी का नाम है।• “सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय”:यह मंत्र शत्रुओं और दुष्ट लोगों को शांत करने और उनकी गतिविधियों को रोकने के लिए है।• “ह्रीं ॐ स्वाहा”:यह मंत्र के अंत में प्रयुक्त होता है, जो देवी को समर्पित होता है और प्रार्थना को पूर्ण करता है। यह मंत्र शत्रुओं को पराजित करने, जीवन में आने वाली कठिनाइयों से मुक्ति पाने, और सफलता प्राप्त करने के लिए शक्तिशाली माना जाता है।  (1)बगलामुखी का एक छोटा मंत्र है: “ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।” यह मंत्र माँ बगलामुखी को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए है.  (2)मां बगलामुखी को प्रसन्न करने के विशेष मंत्र – — ‘ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा। ‘ नोट : हल्दी की माला से इस मंत्र का जप करें. नोट : रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करें. (3)मां बगलामुखी के इन मंत्रों के जप से दूर हो जाती हैं सभी समस्याएं – — ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै सर्व दुष्टानाम वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिह्वाम कीलय-कीलय बुद्धिम विनाशाय ह्लीं ॐ नम: इस मंत्र को मां का विशेष मंत्र माना जाता है। मां के इस मंत्र का जप करने से मां प्रसन्न होती हैं और सभी मनोकामनाओं को पूरा करती हैं। (4)*माँ बगलामुखी का दिव्य मन्त्र* “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं …— *माँ बगलामुखी का दिव्य मन्त्र* “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।” यह मन्त्र माँ बगलामुखी की अपार शक्ति का प्रतीक है। जब हम इसे पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ जपते हैं, तो यह हमारे जीव…बगलामुखी माता, दस महाविद्यओं में से आठवीं महाविद्या है और इसे देवी पार्वती का एक उग्र स्वरूप माना जाता है। बगलामुखी माता को शत्रुओं का नाश करने वाली और वाक सिद्धि प्रदान करने वाली देवी माना जाता है ।माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। … यह भगवती पार्वती का उग्र स्वरूप है। … व्यष्ठि रूप में शत्रुओ को नष्ट करने की इच्छा रखने वाली तथा समिष्टि रूप में परमात्मा की संहार शक्ति ही बगला है। पिताम्बराविद्या के..दंतकथा सत्य युग (हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान में पहला युग) में, एक महान तूफान ने सृष्टि को नष्ट करना शुरू कर दिया। भगवान विष्णु परेशान हो गए और उन्होंने हल्दी की झील, हरिद्रा सरोवर के तट पर देवी पार्वती को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की।…करें मां बगलामुखी के नामों का मंत्र जप, जीवन की हर समस्या होगी दूर।,—————————————————————(5)बगलामुखी के लिए 36 अक्षरों का मंत्र क्या है?36 अक्षरों का अचूक बगलामुखी महामंत्र “ऊं हल्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय, जिहवां कीलय बुद्धिं विनाशय हल्रीं ऊं स्वाहा।36 अक्षरों का अचूक बगलामुखी महामंत्र “ऊं हल्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं …बगलामुखी माता मंदिर, नलखेडा!मध्यप्रदेश में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का यह मंदिर आगर जिले की तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। यहाँ देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं।इस मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती भी विराजमान हैं। इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय पाने के लिए भगवान कृष्ण के निर्देश पर महाराजा युधि‍ष्ठिर ने की थी। मान्यता यह भी है कि यहाँ की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है |• बगलामुखी• बगलामुखी• बगलामुखी• • • कैसे पहुंचें:वायु मार्गनिकटतम देवी अहिल्या बाई होलकर हवाई अड्डा इंदौर, जो 156 किमी दूर है। यह मध्य प्रदेश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है और दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद, कोलकाता, बेंगलुरु, रायपुर और जबलपुर जैसे शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।ट्रेन द्वारानिकटतम रेलवे स्टेशन उज्जैन 98 किमी दूर है। उज्जैन रेल, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद और बैंगलोर जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।सड़क के द्वाराआगर मालवा सड़क से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप यहां एक कैब किराए पर ले सकते हैं या उज्जैन (98 किमी), इंदौर (156 किमी), भोपाल (182 किमी), और कोटा राजस्थान (191 किमी) से बस पकड़कर यहां पहुंच सकते हैं।• माता बगलामुखी बगुला पक्षी पर सवार हैं। जो भगवान गरुड़ के समान एक दिव्य पक्षी है। माता का बगुला पक्षी पर सवार होना उनकी विशेषता और शक्ति का प्रतीक है।बगलामुखी से धन प्राप्ति के लिए कौन सा मंत्र है?———————————————————–ऊँ श्री हृीं ऐं भगवती बगले मे श्रियं देहि-देहि स्वाहा।। इस मंत्र के प्रयोग से साधक कभी दरिद्र नहीं होता। 1- संतान प्राप्ति के लिए: अशोक के पत्ते, कनेर के पुष्प, तिल व दुग्ध मिश्रित चावल से हवन करना चाहिए। 2- अत्यधिक धन प्राप्ति के लिए चंपा के पुष्प से हवन करना चाहिए।मां बगलामुखी का यह मंत्र एक साथ 1000 मनोकामना 9 दिन में कर देता है पूरी, मंत्र जप के बाद कर लें यह काममां बगलामुखी का यह मंत्र एक साथ 1000 मनोकामना 9 दिन में कर देता है पूरी, मंत्र जप के बाद कर लें यह कामअगर किसी के जीवन कितनी ही जटिल समस्या क्यों न हो, अगर वह मां बगलामुखी की शरण में जाकर माता से प्रार्थना करें एवं मां बगलामुखी के इस सरल मंत्र का केवल 9 दिनों तक हर रोज हल्दी की माला से 3 माला जप करना है। जप के बाद आखरी दिन नीचे बताई गई सामग्रियों से 251 मंत्रों का हवन करना है। हवन में गाय का घी एवं आम, पीपल, पलाश गुलर एवं अकाव की लकड़ी ही प्रयोग करना है।और पीले वस्त्र पहने।मंत्र-ऊँ श्री हृीं ऐं भगवती बगले मे श्रियं देहि-देहि स्वाहा।।इस मंत्र के प्रयोग से साधक कभी दरिद्र नहीं होता। 1- संतान प्राप्ति के लिए: अशोक के पत्ते, कनेर के पुष्प, तिल व दुग्ध मिश्रित चावल से हवन करना चाहिए।2- अत्यधिक धन प्राप्ति के लिए चंपा के पुष्प से हवन करना चाहिए।3- देव-स्तवन एवं तंत्र-सिद्धि के लिए नमक, शक्कर, घी से हवन करना चाहिए।4- आकर्षण के लिए सरसों से हवन करना चाहिए।5- वशीकरण एवं उच्चाटन के लिए गिद्ध एवं कौए के पंख, तेल, राई, शहद, शक्कर से हवन करना चाहिए।6- शत्रु नाश के लिए शहद, घी, दुर्वा से हवन करना चाहिए।7- रोग नाश के लिए गुग्गल, घी से हवन करना चाहिए।8- राजवश्यता के लिए गुग्गल व तिल से हवन करना चाहिए।9- जेल से मुक्ति व गृह-शांति के लिए पीली सरसों, काले तिल, घी, लोभान, गुग्गल, कपूर, नमक, काली मिर्च, नीम की छाल से हवन करना चाहिए। माता बगलामुखी की साधना जिस घर में होती है उस घर के लोग शत्रु, रोग, दुख-दारिद्रय, कलह आदि से मुक्त रहते हैं।इस मंत्र का जप 9 दिनों तक एक अनुष्ठान के रूप में करना है। 9 दिनों तक संभव हो तो भूमि पर शयन करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। अपने काम स्वयं करें। नाखुन एवं सिर का बाल न काटे। जप सुबह 4 बजे से लेकर 8 बजे से पहले ही एक निर्धारित समय पर ही करना है। जप के समय गाय के घी का दीपक जलते रहना चाहिए। पूजा में 9 दिनों तक धुले हुये सफेद या पीले वस्त्र पहने।बगलामुखी में सती का कौन सा भाग गिरा था?

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