26/11 मुंबई हमले का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा
संवाददाता
26 April 2025
अपडेटेड: 2:44 PM 0thGMT+0530
गोलमोल जवाबों से जांच में बाधा, किसे बचा रहा है?
गोलमोल जवाबों से जांच में बाधा, किसे बचा रहा है?
मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा की जांच में नया मोड़ आया है। अमेरिका से प्रत्यर्पित होने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के दिल्ली कार्यालय में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राणा से लगभग आठ घंटे तक पूछताछ की। लेकिन राणा ने सहयोग करने के बजाय गोलमोल और अस्पष्ट जवाब दिए, जिससे जांच में बाधा उत्पन्न हो रही है। मुंबई पुलिस ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में NIA को बताया कि राणा का असहयोगी रवैया यह सवाल उठाता है कि वह किसे बचाने की कोशिश कर रहा है।
2008 के मुंबई हमले, जिसमें 166 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए, ने भारत को झकझोर दिया था। राणा पर आरोप है कि उसने अपने सहयोगी डेविड कोलमैन हेडली के साथ मिलकर हमले की योजना बनाई और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के साथ मिलकर इसे अंजाम दिया। NIA को शक है कि राणा न केवल मुंबई, बल्कि दिल्ली सहित अन्य भारतीय शहरों में भी समान आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या राणा के तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और LeT के सरगना हाफिज सईद या अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से जुड़े हैं।
राणा ने कोर्ट में अपने परिवार से फोन पर बात करने की अनुमति मांगी, लेकिन NIA ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वह संवेदनशील जानकारी लीक कर सकता है। विशेष NIA जज चंदर जीत सिंह ने राणा की याचिका खारिज कर दी और उसे 18 दिन की हिरासत में भेजा। NIA अब राणा से गहन पूछताछ कर साजिश के पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश कर रही है, जिसमें हेडली के साथ उसकी दर्जनों फोन कॉल्स और दुबई में एक रहस्यमय व्यक्ति से मुलाकात की जांच शामिल है।
राणा का प्रत्यर्पण 26/11 पीड़ितों के लिए न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, उसके गोलमोल जवाब जांच को जटिल बना रहे हैं। NIA का मानना है कि राणा की हिरासत और पूछताछ से आतंकी साजिश के और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होंगे।