27 नक्सलियों ने सौंपा खजाना और हथियार, अब पूरी तरह ‘लाल आतंक’ से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ का बीजापुर

khabar pradhan

संवाददाता

1 April 2026

अपडेटेड: 3:10 PM 0stGMT+0530

27 नक्सलियों ने सौंपा खजाना और हथियार, अब पूरी तरह ‘लाल आतंक’ से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ का बीजापुर

1 अप्रैल 2026
बीजापुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल उन्मूलन अभियान में एक ऐसा मोड़ आया है जिसे इतिहास हमेशा याद रखेगा। बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने के संकल्प के अंतिम चरण में, बीजापुर जिले में नक्सलियों ने घुटने टेक दिए हैं। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि एक पूरी विचारधारा की हार है, क्योंकि नक्सलियों ने न केवल हथियार डाले, बल्कि अपना पूरा ‘खजाना’ भी सरकार को सौंप दिया है।
बीजापुर में ‘ऐतिहासिक सरेंडर’: सोने और नकदी का अंबार
नक्सल मुक्त भारत अभियान के आखिरी दिनों में बीजापुर से जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने सबको हैरान कर दिया। नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने भारी मात्रा में संपत्ति समर्पित की है:
* 7.20 किलोग्राम सोना: नक्सलियों ने अपना सालों से जमा किया गया सोना जवानों को सौंप दिया।
* 2.90 करोड़ रुपये नकद: लेवी और वसूली के जरिए जुटाया गया करोड़ों का कैश अब सरकारी खजाने में है।
* 100 से ज्यादा आधुनिक हथियार: हिंसा का रास्ता छोड़ 100 से अधिक हथियारों का जखीरा सरेंडर किया गया।
27 नक्सलियों का सामूहिक आत्मसमर्पण
संविधान पर भरोसा जताते हुए 27 से अधिक नक्सलियों ने एक साथ हथियार छोड़े। इनमें 16 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली भी शामिल है। इन सभी नक्सलियों पर कुल 1.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। यह सामूहिक आत्मसमर्पण इस बात का सबूत है कि अब नक्सलियों के भीतर का डर खत्म हो चुका है और वे मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं।
2 साल में बदला बीजापुर: 1003 माओवादियों की घर वापसी
आंकड़े गवाह हैं कि पिछले दो वर्षों में बदलाव की लहर कितनी तेज थी:
* 1 जनवरी 2024 से 31 मार्च 2026 तक: कुल 1003 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया।
* रिकॉर्ड बरामदगी: इस पूरी अवधि में अब तक कुल 19.43 करोड़ रुपये नकद और 8.20 किलोग्राम सोना बरामद किया जा चुका है।
* करोड़ों का इनाम: आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 6.63 करोड़ रुपये का इनाम था।

बीजापुर के ग्रामीणों ने अब नक्सलियों के बजाय विकास (सड़क, बिजली, पानी) को चुन लिया है।बीजापुर को नक्सल मुक्त घोषित करना इस लंबे युद्ध की आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण जीत मानी जा रही है।गृह मंत्री विजय शर्मा और राज्य सरकार के दृढ़ संकल्प ने बस्तर के माथे से नक्सलवाद का कलंक धो दिया है।

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