27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का पूरा सच:कैसे मौत के गड्ढे में फंसे युवराज मेहता:

khabar pradhan

संवाददाता

21 January 2026

अपडेटेड: 5:38 PM 0stGMT+0530

27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का पूरा सच:कैसे मौत के गड्ढे में फंसे युवराज मेहता:



इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बिल्डर गिरफ्तार:

27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ये सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और फेल रेस्क्यू सिस्टम की तस्वीर है…

दरअसल, 16 और 17 जनवरी की दरम्यानी रात, घने कोहरे के बीच युवराज अपने गुरुग्राम स्थित ऑफिस से नोएडा के सेक्टर-150 स्थित घर लौट रहे थे। कम विजिबिलिटी के कारण उनकी कार एक निर्माणाधीन स्थल पर बनी टूटी बाउंड्री से टकराकर करीब 30 से 70 फीट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी।‌जान बचाने के लिए युवराज किसी तरह डूबती कार से बाहर निकले और उसकी छत पर चढ़ गए।

बताया जा रहा है कि वो करीब डेढ़ से दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझते रहे।  उन्होंने अपने पिता को फोन कर कहा पापा, मुझे बचा लो…युवराज ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर लगातार इशारे किए। हैरानी की बात ये है कि मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद थी, लेकिन आरोप है कि किसी ने भी समय रहते उन्हें बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में युवराज की मौत का कारण दम घुटना और कार्डियक अरेस्ट बताया गया है।

अब इस मामले में सियासत भी तेज हो गई है…

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई करते हुए नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को पद से हटा दिया, उन्हें वेटलिस्ट में डाला गया और नोएडा मेट्रो के एमडी पद से भी हटाया गया।  एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया गया है और तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की गई है, जो पांच दिन में रिपोर्ट देगी।  लेकिन आम आदमी पार्टी ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह कार्रवाई केवल औपचारिक है।  उन्होंने सीधे तौर पर नोएडा की डीएम मेधा रूपम की जिम्मेदारी तय करने की मांग की और राजनीतिक संरक्षण के आरोप भी लगाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मौके पर पुलिस और रेस्क्यू टीम मौजूद थी, तो युवराज मेहता की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी? क्या ये सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी नहीं?

टिप्पणियां (0)