45% पद खाली, कैसे सुधरेगा सरकारी स्कूलों का स्तर?

khabar pradhan

संवाददाता

21 February 2026

अपडेटेड: 11:16 PM 0stGMT+0530

पढ़ाई पर असर, एक लाख शिक्षकों की कमी से बिगड़ रही व्यवस्था
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब एक लाख शिक्षकों की कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कैग की रिपोर्ट में सामने आया है कि राज्य अनिवार्य छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखने में असफल रहा है, जिसके कारण कई स्कूलों में एक ही शिक्षक पर बड़ी संख्या में छात्र निर्भर हैं।

मिडिल स्कूलों में भी स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार मिडिल स्कूलों में मानक 35 छात्रों पर एक शिक्षक का है, लेकिन कई जगह 37 या उससे अधिक छात्र एक शिक्षक पर हैं। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है और छात्रों को व्यक्तिगत ध्यान नहीं मिल पा रहा है।

सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी में हालात और खराब
सेकेंडरी स्कूलों में 30:1 का अनुपात होना चाहिए, लेकिन कई जगह 40 छात्र एक शिक्षक पर हैं। सबसे खराब स्थिति हायर सेकेंडरी स्कूलों की है, जहां 30 छात्रों की जगह 54 छात्रों के लिए एक ही शिक्षक है। यही कारण है कि हायर सेकेंडरी में 45% और सेकेंडरी में 40% पद खाली हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा संकट, शहरी स्कूल बेहतर
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि शिक्षकों की पोस्टिंग नामांकन के अनुसार संतुलित नहीं है। ग्रामीण स्कूलों में रिक्तियां ज्यादा हैं, जबकि कुछ शहरी स्कूलों की स्थिति कुछ बेहतर है। जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के कारण शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं।

भर्ती और चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल
कैग ने संकेत दिया है कि समय पर पद नहीं भरे गए तो शिक्षा की गुणवत्ता और परिणाम दोनों प्रभावित होंगे। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया और अनुबंधों में अनियमितताओं की बात भी सामने आई है। कई मामलों में नियमों का पालन नहीं हुआ और पुराने टेंडर का उपयोग कर भुगतान किया गया, जबकि कुछ मामलों में बिना उचित मूल्यांकन के कार्य स्वीकृत किए गए।

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