77वां गणतंत्र दिवस 2026: स्वतंत्रता संग्राम से सशक्त और उज्ज्वल भारत तक:

khabar pradhan

संवाददाता

26 January 2026

अपडेटेड: 6:25 PM 0thGMT+0530

77वां गणतंत्र दिवस 2026: स्वतंत्रता संग्राम से सशक्त और उज्ज्वल भारत तक:



गणतंत्र दिवस भारत के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और गौरवशाली पर्व:

गणतंत्र दिवस भारत के इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवशाली पर्व है। हर वर्ष 26 जनवरी को पूरा देश इस दिन को संविधान के सम्मान और लोकतंत्र की शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाता है। वर्ष 2026 में भारत 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, जो हमें स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के मजबूत और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा का स्मरण कराता है।


भारत को आज़ादी यूँ ही नहीं मिली। यह सदियों की गुलामी, अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध किए गए संघर्ष का परिणाम है।
महात्मा गांधी के नेतृत्व में चले सत्याग्रह और अहिंसा आंदोलन ने स्वतंत्रता की लड़ाई को जन-आंदोलन बनाया।
वहीं भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, रानी लक्ष्मीबाई जैसे वीरों के बलिदान ने देश की आत्मा को झकझोर दिया।

1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन—हर चरण ने भारत को स्वतंत्रता के और निकट पहुँचाया।

स्वतंत्रता के बाद देश को एक स्पष्ट दिशा देने के लिए 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू किया गया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में तैयार यह संविधान विश्व का सबसे बड़ा लिखित संविधान है, जो सभी नागरिकों को , समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, धार्मिक सहिष्णुता का अधिकार प्रदान करता है।

इसी संविधान के कारण भारत आज एक सशक्त लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित है।


पिछले 77 वर्षों में भारत ने विकास की नई ऊँचाइयों को छुआ है।
आज भारत—
चंद्रयान मिशन के माध्यम से अंतरिक्ष में अपनी क्षमता सिद्ध कर चुका है
डिजिटल इंडिया से विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल लोकतंत्र बन रहा है
मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया से आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है
विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है l

आज का भारत युवा शक्ति, तकनीक और नवाचार का केंद्र बन चुका है।


भारत की पहचान उसकी विविधता में एकता है। अलग-अलग भाषाएँ, संस्कृतियाँ और परंपराएँ होते हुए भी देश एक सूत्र में बंधा है। हमें यह हमेशा याद दिलाता है कि संविधान में केवल अधिकार ही नहीं मिले, बल्कि नागरिक कर्तव्यों   भी बताए गए हैं , जिनका प्रत्येक नागरिक को स्वेच्छा से पालन करना चाहिएl


77वां गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को दोहराने का अवसर है।
यह दिन हमें प्रेरित करता है कि हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाएं—
एक सशक्त, आत्मनिर्भर, समृद्ध और विश्वगुरु भारत।

जय हिंद! जय भारत!

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