ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों की परेशानी:

khabar pradhan

संवाददाता

22 January 2026

अपडेटेड: 4:11 PM 0ndGMT+0530

ई-अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों की परेशानी:




ई-अटेंडेंस नहीं लगने पर शिक्षकों की दो महीने की सैलरी रुकी:
मध्य प्रदेश में शिक्षकों की अटेंडेंस की व्यवस्था अब शिक्षा सुधार से ज्यादा शिक्षकों की परेशानी बनती जा रही है।
क्योंकि कभी लाइट नहीं होती कभी नेटवर्क नहीं होता । इस वजह से कई शिक्षक रोजाना समय पर हाजिरी दर्ज नहीं करा पाते । हालत यह हो जाते हैं कि समय पर हाजरी दर्ज कराने के लिए स्कूल की छत , ऊंची मचान, खुले मैदान में मोबाइल लेकर भटकते नजर आते हैं । जिसकी मुख्य वजह है– नेटवर्क।
जिन इलाकों में आज भी कनेक्टिविटी नहीं है, वहां ई अटेंडेंस किसी डिजिटल सुविधा से बड़ी समस्या बन गई है।
अटेंडेंस दर्ज न होने के कारण शिक्षकों के वेतन पर असर पड़ रहा है।  कई शिक्षक संगठन दावा कर रहे हैं कि विभागीय सख्ती के चलते करीब 15000 शिक्षकों की दो महीने की सैलरी रोक दी गई है।
सचिन और आयुक्त से भी मिले शिक्षक:
अटेंडेंस का विरोध में ज्यादातर शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है । शिक्षकों का तर्क है कि उपस्थिति का आकलन किम से होना चाहिए ना कि नेटवर्क की ताकत से ।

मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर क्षत्रिय सिंह राठौड़ ने बताया कि विभागीय सचिव और आयुक्त से मिलकर आए हैं, उन्हें नेटवर्क संबंधी तकनीकी दिक्कतों से अवगत कराया है । उन्होंने यह भी कहा है कि नेटवर्क के कारण शिक्षकों की सैलरी नहीं रुकना चाहिए।

अटेंडेंस का मामला पहुंचा हाई कोर्ट:

शिक्षक नेता सत्येंद्र सिंह ने बताया कि अटेंडेंस की तकनीकी और व्यावहारिक कमियों को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की जा चुकी है । जिसमें ई अटेंडेंस को अनिवार्य करने और वेतन रोकने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है । याचिका में कहा गया है कि नेटवर्क फेल होने को शिक्षक की गलती मानना अन्यायपूर्ण है।

विभागीय अधिकारियों का कहना:

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ईअटेंडेंस सिस्टम लागू करने का मुख्य उद्देश्य था कि इससे शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित हो सके।  फर्जी हाजिरी पर रोक लगे और पढ़ाई के गुणवत्ता में सुधार हो। विभाग का दावा है कि डिजिटल अटेंडेंस से पारदर्शिता बढ़ेगी और स्कूल की मॉनिटरिंग आसान होगी।

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