उत्तराखंड में समाजवादी पार्टी की होने जा रही है एंट्री:चुनौतियों के बीच अखिलेश यादव ने खेला बड़ा दांव:
संवाददाता
24 January 2026
अपडेटेड: 4:00 PM 0thGMT+0530
समाजवादी पार्टी और उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव एक नई नई राजनीतिक रणनीति की बनाने की तैयारी कर रहे हैं। जिसके जरिए वह उत्तर प्रदेश से बाहर भी पार्टी का दायरा बढ़ाने की कोशिश में जुट गए हैं।
अखिलेश यादव की नजर अब उत्तराखंड पर है। उत्तर प्रदेश से सटे इस पहाड़ी राज्य में भी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और अखिलेश यादव अभी से सियासी जमीन टटोलने में लग गए हैं। लेकिन ये राह उनके लिए आसान नहीं मानी जा रही, क्योंकि उत्तराखंड में अब तक राजनीति का मैदान बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही सिमटा रहा है। इसी चुनौती के बीच अखिलेश यादव ने एक बड़ा दांव खेला है। करीब एक साल से खाली पड़े उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष पद पर उन्होंने 35 साल के महंत शुभम गिरी को नियुक्त कर दिया है।
इस एक फैसले से अखिलेश यादव ने कई सियासी संकेत दिए हैं। पहला शुभम गिरी युवा हैं, यानी पार्टी को युवाओं से जोड़ने की कोशिश।
दूसरा वे एक महंत हैं, यानी देवभूमि उत्तराखंड में धर्म के जरिए सियासत को धार देने की रणनीति। समाजवादी पार्टी को लगता है कि खुद को धर्म से दूर रखने की छवि के कारण उसे उत्तराखंड में नुकसान हुआ है। अब महंत शुभम गिरी के जरिए पार्टी धार्मिक पहचान के रास्ते जनाधार बढ़ाने की कोशिश करेगी। शुभम गिरी हरिद्वार के रहने वाले हैं और लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं।
आपको याद दिला दें कि करीब एक साल पहले अखिलेश यादव ने उत्तराखंड में पार्टी की सभी यूनिट्स को भंग कर दिया था। तभी से नए नेतृत्व की तलाश चल रही थी, जो अब पूरी हो गई है।
अब अगला लक्ष्य है—राज्य भर में संगठन खड़ा करना और जिला व मंडल स्तर पर पदाधिकारियों की नियुक्ति। हालांकि समाजवादी पार्टी के सामने उत्तराखंड में एक बड़ी राजनीतिक दीवार भी है—रामपुर तिराहा कांड।
साल 1994 में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहे पर हुई पुलिस फायरिंग आज भी यहां की राजनीति में जिंदा है। उस घटना में 7 आंदोलनकारियों की मौत हुई थी।श्र उस वक्त उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, और यही कारण है कि आज भी पहाड़ी इलाकों में सपा को लेकर नाराजगी देखी जाती है। अब जरा नजर डालते हैं समाजवादी पार्टी के चुनावी रिकॉर्ड पर। 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में सपा ने 63 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। 2007, 2012, 2017 और 2022—हर चुनाव में पार्टी का वोट शेयर गिरता ही गया। 2022 के चुनाव में 54 सीटों पर उम्मीदवार उतारने के बावजूद पार्टी को सिर्फ 0.3 फीसदी वोट मिले। हालांकि साल 2004 के लोकसभा चुनाव में सपा ने हरिद्वार सीट जरूर जीती थी, लेकिन उस सफलता को आगे नहीं बढ़ा सकी।
अब सवाल यही है कि क्या महंत शुभम गिरी के सहारे अखिलेश यादव उत्तराखंड में सपा की खोई हुई जमीन वापस पा सकेंगे? क्या धर्म के रास्ते समाजवादी पार्टी अपनी चुनावी वैतरणी पार कर पाएगी…