लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष लाया अविश्वास प्रस्ताव

khabar pradhan

संवाददाता

10 February 2026

अपडेटेड: 4:06 PM 0thGMT+0530

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष लाया अविश्वास प्रस्ताव

संसद का बजट सत्र चालू है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिल रहा है ।‌ यह टकराव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है।
विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर पर पक्षपात पूर्ण रवैया का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
किंतु विपक्ष की ओर से लाए हुए इस अविश्वास प्रस्ताव पर विपक्षी दलों की पूर्ण सहमति नहीं बन पाई।
पूरे विपक्ष की एकजुटता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए । किंतु तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी ने इस अविश्वास प्रस्ताव से किनारा कर लिया।
जिससे इस प्रस्ताव को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। और पूरे कांग्रेस में टेंशन फैल गया है।

क्यों लाया गया अविश्वास प्रस्ताव:

दरअसल विपक्षी पार्टियों ने यह आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष को खुलकर बोलने की आजादी नहीं दी जा रही है। खासकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बार-बार बोलने से रोका जाता है और अक्सर उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं।

कांग्रेस सांसद केसरी वेणुगोपाल का कहना है कि यह संसदीय परंपरा के विपरीत है। जिसमें नेता प्रतिपक्ष को ‘शैडो प्रधानमंत्री ‘ का दर्जा प्राप्त होता है। किंतु मौजूदा हालात में नेता प्रतिपक्ष को सदन में अपनी बात रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा।
आपको बता दें कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए । किंतु इसमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस अविश्वास प्रस्ताव पर साइन नहीं किया।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि आज दोपहर 1:14 पर लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है।
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का कहना है कि मोदी सरकार संसद चलाने में विश्वास नहीं रखती और विपक्ष को बोलने का मौका नहीं दिया जाता।

कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि यदि लोकसभा स्पीकर राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं देते हैं तो विपक्ष इस अविश्वास प्रस्ताव को आगे बढ़ाएगी और यदि उन्हें बोलने दिया जाता है तो इस कदम को आगे रोका जा सकता है।

इस बजट सत्र के दौरान संसद में राहुल गांधी ने पूर्व सेवा प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की किताब को लेकर फिर जबरदस्त घमासान देखने को मिला । नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस किताब के एक पुराने ट्वीट का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने इस किताब के उपलब्ध होने की जानकारी साझा की थी जबकि पेंगुइन पब्लिकेशन का दावा है कि यह किताब कभी प्रकाशित ही नहीं हुई। यह तो नरवणे का बयान गलत है या प्रकाशक की बात सही नहीं है। इसी मुद्दे पर विपक्ष दलों के सांसदों ने जमकर हंगामा किया। जिससे आज भी सदन की कार्यवाही बाधित हुई और दोपहर 12:00 बजे तक स्थगित करना पड़ा।

कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सचिवालय को सौंप दिया है। और सचिवालय के तरफ से यह प्रतिक्रिया देते हुए कहा गया है कि नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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