प्रदेश में तृतीय – चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पेंशन पर विभाग ही करेंगे फैसला

khabar pradhan

संवाददाता

11 February 2026

अपडेटेड: 6:09 PM 0thGMT+0530

प्रदेश में तृतीय – चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पेंशन पर विभाग ही करेंगे फैसला

कर्मचारियों की पेंशन रोकने के मामले का निर्णय: प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की पेंशन रोकने के मामले में निर्णय अब प्रशासकीय विभाग ही करेंगे। जबकि, प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के मामले निर्णय के लिए कैबिनेट के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे। केंद्र से प्रदेश में सेवा देने के लिए आने वाले कर्मचारियों की पेंशन की गणना की कार्यप्रणाली में भी सुधार होगा। पेंशनर्स एसोसिएशन ने इस निर्णय का स्वागत किया है। एसोसिएशन के संरक्षक गणेश दत्त जोशी का कहना है कि 18 वर्ष के संघर्ष के सुखद परिणाम सामने आए।

आहार अनुदान योजना जारी रहेगीः

बैठक में 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जनजातीय कार्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की निरंतरता के लिए 7,133 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए लागू आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रुपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703 करोड़, सांदीपनि विद्यालय के लिए 1,416 करोड़, आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है l इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा मंडल को शुल्क की प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति जनजाति के अभ्यार्थियों को छात्रवृत्ति, कक्षा-नौंवीं की छात्रवृत्ति के लिए 522 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई।
मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना भी जारी रखी जाएगी।

दिव्यांग आश्रित को भी मिलेगा लाभ

एक जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारी भी परिवार पेंशन के दायरे में आएंगे। इन कर्मचारियों को प्रतिमाह 14 प्रतिशत अंशदान देना होता है। इतनी ही राशि राज्य सरकार भी मिलाती है। परिवार पेंशन का लाभ कर्मचारी के निधन के बाद पति/पत्नी व आश्रित को पेंशन की पात्रता होगी। परिवार पेंशन के लिए आश्रित की आय सीमा न्यूनतम पेंशन (7,750 रुपये) के साथ अब महंगाई राहत जोड़कर निर्धारित होगी। मानसिक रूप से दिव्यांग आश्रित को भी आजीवन परिवार पेंशन का लाभमिलेगा।

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