मेडिकल कॉलेज की छात्रा ने क्यों की आत्महत्या, जानें

khabar pradhan

संवाददाता

11 February 2026

अपडेटेड: 7:27 PM 0thGMT+0530

मेडिकल कॉलेज की छात्रा ने क्यों की आत्महत्या, जानें

गांधी मेडिकल कॉलेज की मेडिकल छात्रा ने तनाव की वजह से की खुदकुशी: बाथरूम में मिला एमबीबीएस की छात्रा का शव

अक्सर यह देखा जाता है कि छात्र-छात्राएं पढ़ाई या किसी अन्य कारणों से तनाव की वजह से या दबाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं ।‌ऐसा ही एक मामला सामने आया है मेडिकल छात्रा की आत्महत्या का!

कोहेफिजा थाना क्षेत्र स्थित बीडीए कॉलोनी के एक निजी हॉस्टल में रह रही एमबीबीएस की छात्रा का शव बाथरूम में मिलने से हड़कंप मच गया। मृतका की पहचान रोशनी सिंह के रूप में हुई है, जो कि अलीराजपुर की रहने वाली थी।

जानकारी के अनुसार रोशनी ने वर्ष 2025 में गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल में एमबीबीएस में प्रवेश लिया था। मंगलवार सुबह जब वह अपने कमरे से बाहर नहीं निकली तो साथ रहने वाली छात्राओं ने उसे बुलाया। इसके बाद बाथरूम में उसका शव मिला।
घटना स्थल के पास एक एसिड की बोतल भी मिली है। बताया जा रहा है कि छात्रा पढ़ाई के तनाव में थी।

कठिन सिलेबस की वजह से थी परेशान:
दरअसल गांधी मेडिकल कॉलेज की प्रथम वर्ष की छात्रा रोशनी सिंह ने कुछ दिन पहले ही एमबीबीएस के प्रथम वर्ष में एडमिशन लिया था और इस कठिन पढ़ाई का जिक्र अपने पिता से कुछ दिनों पहले किया भी था। दो दिन पहले ही वह अपने घर अलीराजपुर में पिता को बताया भी था उसने कहा था कि कठिन पढ़ाई की वजह से उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है हालांकि उसने इसे सॉल्व करने की बात भी कही थी

कॉलेज प्रबंधन और साथियों से भी इस बात का जिक्र किया था कि पढ़ाई को लेकर वह तनाव में रहती है।

नहीं मिला कोई सुसाइड नोट:
पुलिस को घटनास्थल से अभी तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। छात्र के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है । प्रथम दृष्टि में पढ़ाई और तनाव के चलते आत्महत्या का कारण माना जा रहा है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पहले भी हो चुकी हैं ऐसी ही घटनाएं:

1.जनवरी 2025 में एमबीबीएस छात्रा ने एक टावर की पांचवी मंजिल से कूद कर जान दे दी थी। जांच में आया कि वह अवसाद और व्यक्तिगत संबंधों में तनाव से ग्रसित था।

2..अप्रैल 2024 में जीएमसी में 5 रेजिडेंट डॉक्टरों ने एक गुमनाम पत्र लिखकर 31 में 2024 को सामूहिक आत्महत्या करने की चेतावनी दी थी।

3..31 जुलाई 2023 को डॉक्टर बाला सरस्वती ने एनेस्थीसिया का ओवरडोज लेकर आत्महत्या की थी। सुसाइड नोट में विभाग में व्याप्त टॉक्सिक कल्चर और प्रताड़ना का आरोप लगाया था।

4..4 जनवरी 2023 को डॉक्टर आकांक्षा माहेश्वरी ने हॉस्टल में एनेस्थीसिया का इंजेक्शन लगाकर जान दे दी थी । सुसाइड नोट में खुद को कमजोर बताते हुए कार्य का बोझ अधिक होने का जिक्र किया था।

मनोचिकित्सक के विचार:
जीएमसी के मनोचिकित्सक डॉक्टर जयप्रकाश अग्रवाल का कहना है कि आत्महत्या जैसे विचार रातों-रात नहीं आते। इसके पीछे अक्सर लंबे समय से चल रही मानसिक उथल-पुथल होती है । पढ़ाई का दबाव हो या घरेलू समस्याएं बच्चे अक्सर अपने मन की बात साझा नहीं कर पाते और फिर अंततः गलत रास्ता चुन लेते हैं। बच्चों के मन में क्या चल रहा था यह माता-पिता ही बता सकते हैं । अगर वे समय रहते मनोचिकित्सक के पास आते हैं, तो ऐसी घटना को टाला जा सकता है।‌

मेंटल हेल्थ एसोसिएशन बनाया जाए:

डॉ महेंद्र प्रताप जो जूडा अध्यक्ष हैं, उनका कहना है कि प्रथम वर्ष का कोर्स इतना कठिन नहीं होता, जिसके लिए ऐसा कदम उठाया जाए । घटना के वास्तविक करणों का पता माता-पिता से बातचीत और जांच के बाद ही चलेगा। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए छात्र स्तर पर मेंटल हेल्थ संगठन बनाया जाएगा ताकि जूनियर छात्र बिना किसी हिचक के अपने सीनियर से समस्याएं साझा कर सकें।

आत्महत्या से बचाव के तरीके:
अपने बच्चों और दोस्तों से नियमित बातचीत करते रहें और उन्हें यह एहसास दिलाए कि वह अकेले नहीं है उनसे संवाद बनाए रखें।
जब भी कोई अपनी परेशानी बताएं तो उसे रोकने या सलाह देने के बजाय उसकी परेशानी ध्यान से सुने।
यदि कोई अचानक गुमसुम रहने लगे या अपने प्रिय चीजों में रुचि न रखें तो सतर्क हो जाएं और बच्चों पर हो रहे बदलाव पर नजर रखें।
मानसिक बीमारी को कलंक ना समझे जैसे शारीरिक चोट के लिए डॉक्टर का होना जरूरी है ।वैसे ही यह मानसिक बीमारी के लिए भी दोस्तों और परिवार का साथ होना जरूरी है।

मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए सरकार के द्वारा मुफ्त सेवाएं संचालित की जा रही हैं । जहां मदद के लिए संपर्क किया जा सकता है। टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर 14416 यह 24/ 7 एक टोल फ्री नंबर है। इसके अलावा मनहित ऐप के माध्यम से भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी और सहायता प्राप्त की जा सकती है।

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