केंद्र की नई ‘प्रहार’ नीति, आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
संवाददाता
24 February 2026
अपडेटेड: 12:27 PM 0thGMT+0530
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस का संदेश, पहली बार बनी व्यापक नीति।
केंद्र सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए पहली बार काउंटर टेररिज्म पॉलिसी ‘प्रहार’ जारी की है। इस नीति का उद्देश्य देश को जल, थल और नभ से होने वाले खतरों से सुरक्षित करना है। सरकार का कहना है कि अब हमले के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले ही खतरे को खत्म करने पर जोर दिया जाएगा। पहलगाम हमले के बाद संसद में हुई चर्चा में गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की थी कि सरकार जल्दी ही आतंकवाद से मुकाबला की नीति बनाएगीl पिछले साल दिसंबर में दिल्ली में एनआईए के दो दिवसीय सम्मेलन में नीति के बारे में प्रमुख एजेंसियों व राज्यों के पुलिस प्रमुखों के साथ चर्चा हुई थी l अब आजादी के 78 साल बाद केंद्र सरकार ने यह नीति जारी की है
हमले से पहले कार्रवाई, सुरक्षा तंत्र होगा और मजबूत।
नई नीति में खुफिया जानकारी के आधार पर समय रहते कार्रवाई करने और आतंकियों के नेटवर्क को तोड़ने की रणनीति शामिल है। इसमें सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने और आतंकियों की ऑनलाइन भर्ती पर रोक लगाने पर भी फोकस किया गया है।
सीमा पार आतंक, साइबर और ड्रोन खतरे पर विशेष ध्यान।
नीति में सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद, अलकायदा और आईएसआईएस जैसे संगठनों के खतरों को प्रमुख रूप से शामिल किया गया है। इसके साथ ही ड्रोन, साइबर हमले, डार्क वेब, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग को भी गंभीर चुनौती माना गया है।
एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर।
केंद्र और राज्यों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सूचनाओं के साझा उपयोग को इस नीति का अहम हिस्सा बनाया गया है। जिस तरह से आतंकवाद को बढ़ावा देने में काउंटर करेंसी,नार्को टेरर, डीपफेक इंटरनेट का इस्तेमाल बड़ा है उसके लिए एक इंटीग्रेटेड पॉलिसी की जरूरत थी l पुलिस, खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा बलों की क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
मानवाधिकार और कानून का पालन भी प्राथमिकता।
नीति में आतंकवाद से सख्ती से निपटने के साथ मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि सुरक्षा और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने के लिए सामाजिक पहल।
कट्टरपंथ रोकने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। समाज, धार्मिक नेताओं और संस्थाओं की मदद से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की योजना बनाई गई है, ताकि आतंकवाद की जड़ पर चोट की जा सके।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से आतंक पर वैश्विक दबाव।
भारत अन्य देशों और संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयास करेगा। जानकारी साझा करने, संयुक्त कार्रवाई और वैश्विक मंचों पर आतंकियों के खिलाफ दबाव बढ़ाने पर भी इस नीति में जोर दिया गया है।