उज्जैन में चैत्र नवरात्रि पर महा अष्टमी पूजा हुई संपन्न: साधु संतों ने मां महालया और महामाया को लगाया भोग

khabar pradhan

संवाददाता

26 March 2026

अपडेटेड: 12:52 PM 0thGMT+0530

उज्जैन में चैत्र नवरात्रि पर महा अष्टमी पूजा हुई संपन्न: साधु संतों ने मां महालया और महामाया को लगाया भोग

26 मार्च 2026 :

मध्य प्रदेश /उज्जैन/

महा अष्टमी पर साधु संतों ने की माता की पूजा:

चैत्र नवरात्रि की महा अष्टमी पर उज्जैन में साधु संतों ने आज नगर पूजन किया यह परंपरा राजा विक्रमादित्य के समय से चली आ रही है।  चैत्र नवरात्र में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और आश्विन नवरात्र में कलेक्टर पूजा करते हैं।
इस परंपरा के निर्वाह के अनुसार चैत्र नवरात्र में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने माता को भोग लगाया।  इस पूजा में लगभग 27 किलोमीटर तक मदिरा की धार लगाई जाती है जो शहर की कई देवी मंदिरों में जाती हैं। इस महा पूजा में अखाड़ा परिषद के सदस्यों के साथ जिला प्रशासन के सदस्य और कई श्रद्धालु पैदल चलते हैं।  यह यात्रा सुबह प्रारंभ होकर शाम तक खत्म होती है। यह यात्रा उज्जैन के प्रसिद्ध 24 खंबा माता मंदिर से प्रारंभ होकर नगर भ्रमण के बाद ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर पर शिखर ध्वजा चढ़ाकर समाप्त होती है। यह महा अष्टमी की महा पूजा सुबह 8:00 बजे से ढोल नगाड़ों के साथ शुरू हुई । बाद में प्रशासनिक अमला तहसीलदार के नेतृत्व में नगर पूजा पर निकल पड़ा। उज्जैन में राजा विक्रमादित्य के समय से यह नगर पूजा की परंपरा चली आ रही है। इस परंपरा के अनुसार माता मंदिर में की गई महा आरती में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष शामिल हुए।  यहां माता की पूजा राजा विक्रमादित्य किया करते थे। माता की आरती के साथ शहर, प्रदेश और देश में सुख शांति के साथ खुशहाली की कामना की गई । इस दौरान बड़ी संख्या में साधु संत भी वहां मौजूद रहे।

माता को लगाया मदिरा का भोग:

इस महा पूजा में कई श्रद्धालु और जिला प्रशासन के सदस्य पैदल चलकर माता की पूजा करते हैं यह यात्रा सुबह शुरू होती है और शाम तक खत्म होती है । इस पूजा में माता को मदिरा का भोग लगाया जाता है जिसमें एक मटके में मदिरा को भर जाता है उसमें एक नीचे छेद किया जाता है और पूरी यात्रा के समय सड़क मार्ग से चलते हुए मदिरा की धार सड़क मार्ग में बहाई जाती है।

सभी श्रद्धालु  ढोल नगाड़ों के साथ इस महा पूजा में शामिल होते हैं और नगर पूजा पर निकल पड़ते हैं। ऐसी मान्यता है की माता की पूजा शहर के राजा किया करते हैं क्योंकि विक्रमादित्य के समय महाराज विक्रमादित्य इस पूजा को संपन्न करते थे। चैत्र नवरात्र में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष यानी निरंजनी अखाड़ा माता का पूजन करते हैं वही आश्विन नवरात्र में इस पूजा को कलेक्टर द्वारा संपन्न किया जाता है।

सभी श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल होकर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पर पहुंचते हैं और महाकाल मंदिर के शिखर पर ध्वज चढ़ाकर इस पूजा को संपन्न करते हैं।

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