ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम: थम सकती है महाविनाश की आहट, जानें क्या हैं 10 बड़ी शर्तें
संवाददाता
9 April 2026
अपडेटेड: 3:11 PM 0thGMT+0530
9 अप्रैल 2026
वाशिंगटन/तेहरान/तेल अवीव
पश्चिम एशिया में पिछले कई दिनों से मंडरा रहे युद्ध के बादलों के बीच राहत की एक बड़ी खबर आई है। अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम के लिए राजी हो गए हैं। इस समझौते के बाद अब दुनिया ने चैन की सांस ली है, क्योंकि कुछ ही समय पहले तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को ‘मिटा देने’ जैसी सख्त चेतावनी दे रहे थे। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि इस युद्धविराम के बाद ईरान और इजरायल दोनों ही पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
समझौते की मुख्य बातें और शर्तें
ईरान ने इस शांति के लिए 10 प्रमुख शर्तें रखी थीं, जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने बातचीत का आधार माना है। इन शर्तों में शामिल हैं:
1. अमेरिका और ईरान एक-दूसरे पर हमला नहीं करेंगे।
2. जलमार्ग ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहेगा।
3. ईरान के परमाणु संवर्धन के अधिकारों को मान्यता दी जाएगी।
4. अमेरिका ईरान पर लगे सभी प्राथमिक प्रतिबंध हटाएगा।
5. तीसरे पक्ष के देशों को प्रभावित करने वाले प्रतिबंध भी खत्म होंगे।
6. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को खत्म किया जाएगा।ख
7. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के पुराने प्रस्तावों को समाप्त किया जाएगा।
8. युद्ध और अन्य नुकसान की भरपाई के लिए ईरान को मुआवजा मिलेगा।
9. खाड़ी क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी होगी।
10. सभी मोर्चों पर युद्ध रुकेगा, जिसमें हिजबुल्लाह जैसे ईरान समर्थित गुट भी शामिल होंगे
इजरायल और लेबनान का रुख
इस समझौते में एक पेंच यह है कि इजरायल युद्धविराम के लिए तैयार तो हो गया है, लेकिन उसने स्पष्ट किया है कि लेबनान में उसकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। इजरायल का कहना है कि लेबनान पर किए जा रहे हमले इस शांति समझौते का हिस्सा नहीं हैं। उधर, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर दोबारा हमला हुआ, तो वे अपनी कार्रवाई फिर शुरू कर देंगे।
भारत का स्वागत और नागरिकों के लिए एडवाइजरी
भारत सरकार ने इस शांति पहल का दिल खोलकर स्वागत किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय का मानना है कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता खुलेगा। हालांकि, सुरक्षा को देखते हुए तेहरान में स्थित भारतीय दूतावास ने एक जरूरी एडवाइजरी जारी की है। इसमें ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को तुरंत वहां से निकलने की सलाह दी गई है। आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में करीब 9,000 भारतीय थे, जिनमें से 1,800 पहले ही वापस लौट चुके हैं।
हॉर्मुज स्ट्रेट और वैश्विक बाजार पर असर
इस समझौते का सबसे बड़ा आर्थिक असर तेल की कीमतों पर पड़ा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को फिर से खोलने के संकेतों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है। यह रास्ता तेल व्यापार के लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है। इसके खुलने की खबर से भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी तेजी आई है।
मध्यस्थता में पाकिस्तान की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है। खबरों के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के सैन्य नेतृत्व ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी। आगामी शुक्रवार को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक भी होने वाली है, जिसमें अमेरिका की ओर से जेडी वेंस और ईरान की ओर से राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शामिल होने की संभावना है।
फिलहाल, अगले 14 दिनों तक दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या यह अस्थायी युद्धविराम एक स्थायी शांति समझौते में बदल पाता है या नहीं।