9 अप्रैल 2026
मुरैना:
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है। यहाँ अवैध रेत का परिवहन रोक रहे एक जांबाज वन रक्षक, हरिकेश गुर्जर की ट्रैक्टर से कुचलकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह घटना दिमनी थाना क्षेत्र के रामपुर चौराहे के पास बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे हुई। आरोपी इतना बेखौफ था कि हत्या करने के बाद उसने पास के पेट्रोल पंप पर जाकर आराम से अपने कपड़े बदले और रेत बेचकर फरार हो गया।
कैसे हुई यह वारदात?
वन विभाग की एक 6 सदस्यीय टीम बुधवार सुबह गश्त पर थी। इसी दौरान टीम को रेत से भरी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली आती दिखी। वन रक्षक हरिकेश गुर्जर और उनकी टीम ने ट्रैक्टर को रुकने का इशारा किया, लेकिन ड्राइवर ने रफ्तार कम करने के बजाय ट्रैक्टर हरकेश के ऊपर चढ़ा दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि हरिकेश की मौके पर ही मौत हो गई। टीम के बाकी सदस्यों ने कूदकर अपनी जान बचाई, वरना माफिया उन्हें भी कुचल देता।
आरोपी का दुस्साहस: हत्या के बाद भी नहीं रहा डर
आरोपी ड्राइवर की पहचान विनोद कोरी के रूप में हुई है। वारदात को अंजाम देने के बाद वह ट्रैक्टर लेकर करीब आधा किलोमीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर पहुँचा। वहाँ लगे सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि उसने हत्या के बाद शांति से अपने कपड़े बदले। इसके बाद वह ट्रैक्टर में भरी अवैध रेत को औने-पौने दाम पर बेचकर फरार हो गया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
राजनीतिक गलियारों में शोक और गुस्सा
इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव और गुस्सा है। मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इस घटना पर गहरी चिंता और शोक व्यक्त किया है। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रेत माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध कारोबार में कुछ रसूखदार लोगों का हाथ है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
वन विभाग में सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर वन विभाग के कर्मचारियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना पर्याप्त हथियारों और सुरक्षा के ये कर्मचारी जान जोखिम में डालकर माफियाओं का सामना करते हैं। फिलहाल, हरिकेश गुर्जर के शव को पोस्टमार्टम के लिए मुरैना अस्पताल भेजा गया है और पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है कि आखिर यह ट्रैक्टर किसका था और इस अवैध धंधे के पीछे कौन-कौन शामिल है।
जान हथेली पर रखकर ड्यूटी कर रहे वन कर्मी, अब तक 7 की शहादत
मध्य प्रदेश में अवैध खनन और माफियाओं का दुस्साहस इस कदर बढ़ गया है कि अब सरकारी कर्मचारियों की जान सुरक्षित नहीं है। मुरैना में हाल ही में वन रक्षक हरिकेश गुर्जर की हत्या ने एक बार फिर प्रदेश की कानून व्यवस्था और मैदानी अमले की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंकड़े दे रहे हैं गवाही: 1 साल में 11,000 से ज्यादा मामले
हैरानी की बात यह है कि प्रदेश में अवैध खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले एक साल के सरकारी आंकड़े डराने वाले हैं:
पिछले एक साल में अवैध खनन और परिवहन के 11,140 मामले दर्ज किए गए।
प्रशासन ने इन मामलों में करीब 83 करोड़ 74 लाख रुपये का जुर्माना वसूला।
जानकारों का कहना है कि माफियाओं पर सिर्फ अर्थदंड (जुर्माना) लगाकर छोड़ दिया जाता है, जिससे उनके हौसले बुलंद हैं। सख्त सजा के प्रावधान होने के बावजूद उन पर अमल कम ही होता है।
बलिदान की लंबी सूची
अवैध खनन रोकने के प्रयास में अब तक प्रदेश के 7 जांबाज अधिकारी और कर्मचारी अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें आईपीएस (IPS) अधिकारी से लेकर पटवारी और वन रक्षक तक शामिल हैं:
1. अप्रैल 2026: हरिकेश गुर्जर (वन रक्षक) – मुरैना
2. मई 2024: महेंद्र बागरी (ASI) – शहडोल
3. नवंबर 2023: प्रसन्न सिंह (पटवारी) – शहडोल
इससे पहले मुरैना में ही ट्रेनी IPS नरेंद्र कुमार की भी पत्थर से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलकर हत्या कर दी गई थी।
खतरे में ‘टाइगर स्टेट’ के रक्षक
सिर्फ खनन ही नहीं, जंगलों की सुरक्षा में तैनात कर्मचारी भी लगातार हमलों का शिकार हो रहे हैं। साल 2026 के शुरुआती 4 महीनों में ही हमले की 6 से ज्यादा बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं:
गुना में अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों का हमला।
खंडवा में अतिक्रमणकारियों द्वारा वनपाल पर हमला।
श्योपुर में वन माफियाओं ने वन रक्षक को घायल किया।
कर्मचारियों में भारी आक्रोश
मध्य प्रदेश वन कर्मचारी मंच के अध्यक्ष अशोक पांडेय का कहना है कि सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। जंगलों की सुरक्षा करने वाले कर्मचारी डंडे लेकर माफियाओं की बंदूकों का सामना कर रहे हैं। वन कर्मचारियों ने अब मुख्यालय पर धरना देकर अपनी सुरक्षा के लिए ठोस कानून और संसाधन की मांग करने का फैसला किया है।


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