भोजशाला विवाद: हिंदू पक्ष की मांग, कहा- 24 घंटे मिले पूजा का अधिकार और गैर-हिंदुओं का प्रवेश हो बंद

khabar pradhan

संवाददाता

11 April 2026

अपडेटेड: 3:51 PM 0thGMT+0530

भोजशाला विवाद: हिंदू पक्ष की मांग, कहा- 24 घंटे मिले पूजा का अधिकार और गैर-हिंदुओं का प्रवेश हो बंद

11 अप्रैल 2026
इंदौर/धार

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इंदौर हाई कोर्ट की खंडपीठ में शुक्रवार को इस मामले की नियमित सुनवाई हुई। हिंदू पक्ष ने अदालत के सामने दलील दी है कि भोजशाला का स्वरूप पूरी तरह से धार्मिक है, इसलिए उन्हें वहां पूरे समय पूजा करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

क्या है हिंदू पक्ष की मुख्य मांगें?
जस्टिस एस. ए. धर्माधिकारी और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की बेंच के सामने हिंदू पक्ष के वकीलों ने अपनी दलीलें पेश कीं। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
24 घंटे पूजा का अधिकार: अभी भोजशाला में पूजा के लिए सीमित समय तय है। हिंदू पक्ष चाहता है कि उन्हें वहां दिन-रात पूजा करने का हक मिले।
गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित हो: याचिका में मांग की गई है कि भोजशाला परिसर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगाई जाए।
मंदिर होने के साक्ष्य: वकीलों ने तर्क दिया कि भोजशाला के पत्थर और उज्जैन के जूना महाकालेश्वर मंदिर के पत्थरों की लिपि एक जैसी है, जो इसके मंदिर होने का पुख्ता प्रमाण है।

अदालत में दी गई दलीलें
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से माता सरस्वती का मंदिर है। शुक्रवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की तरफ से वकील मनीष गुप्ता ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने भोजशाला से जुड़े पुराने साहित्य और ऐतिहासिक साक्ष्यों को अदालत के सामने पेश किया ताकि इसे मंदिर सिद्ध किया जा सके।

अब 15 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट में भोजशाला मामले से जुड़ी अलग-अलग याचिकाओं पर क्रमवार सुनवाई चल रही है। शुक्रवार को लंबी बहस के बाद अदालत ने इस मामले की अगली तारीख 15 अप्रैल तय की है। सोमवार को होने वाली इस सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट इस मामले में कोई महत्वपूर्ण निर्देश दे सकता है।
भोजशाला का यह विवाद दशकों पुराना है और फिलहाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की देखरेख में है। हिंदू पक्ष का मानना है कि वैज्ञानिक सर्वे और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर जल्द ही इस स्थान की धार्मिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी।

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