14 अप्रैल 2026

नई दिल्ली:
अमेरिका के राष्ट्रपति की आलोचना के बाद पोप लियो ने साफ कहा है कि वे किसी से डरने वाले नहीं हैं और युद्ध के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा शांति और संवाद को बढ़ावा देना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर पोप के बयान के बाद यह विवाद बढ़ा। इसके जवाब में पोप ने कहा कि वे किसी भी सरकार या नेता के दबाव में नहीं आएंगे और मानवता के हित में अपनी बात रखते रहेंगे।

कूटनीतिक समाधान की जरूरत पर जोर
पोप ने खास तौर पर ईरान, लेबनान और क्षेत्रीय संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर बार-बार युद्ध की बजाय बातचीत और कूटनीतिक समाधान की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि हर देश को शांति बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक नेता होने के नाते उनका कर्तव्य है कि वे लोगों के बीच प्रेम, शांति और संवाद का संदेश फैलाएं। किसी भी तरह की हिंसा या युद्ध को वे सही नहीं मानते।

अमेरिका की प्रतिक्रिया
इस बीच, अमेरिका की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर कहा कि अगर वे राष्ट्रपति न होते तो हालात और खराब हो सकते थे। उन्होंने पोप के कुछ बयानों पर असहमति जताते हुए कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना जरूरी है।

पोप ने अपने बयान में यह भी कहा कि वे युद्ध के खिलाफ लगातार बोलते रहेंगे और दुनिया के नेताओं से अपील करते हैं कि वे बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालें। उनका मानना है कि संघर्ष से किसी का भला नहीं होता, जबकि संवाद ही स्थायी शांति का रास्ता है।