21 अप्रैल 2026
भोपाल:
राजधानी भोपाल का खूबसूरत शाहपुरा तालाब इन दिनों एक अजीबोगरीब समस्या से जूझ रहा है। यहां चूहों ने इस कदर आतंक मचा रखा है कि तालाब की पाल, फुटपाथ और आसपास की सड़कें खोखली होने लगी हैं। नगर निगम द्वारा तालाब के कायाकल्प और सौंदर्यीकरण के लिए करीब 6.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन चूहों की इस खुदाई ने करोड़ों के काम और तालाब के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।
तालाब के आसपास की जमीन को कर रहे खोखला
तालाब के किनारे रहने वाले ये चूहे आम चूहों जैसे छोटे नहीं हैं, बल्कि इनका वजन डेढ़-डेढ़ किलो तक पहुंच गया है। इन भारी-भरकम चूहों ने तालाब के किनारों और ऋषभवदेव पार्क की जमीन में 50 से भी ज्यादा गहरी सुरंगें बना ली हैं। आलम यह है कि तालाब किनारे बना फुटपाथ कई जगहों से धंस गया है और जमीन धंसने की वजह से किनारे पर बनी दीवारें भी टूटने लगी हैं, जो यहां टहलने आने वाले लोगों के लिए बड़े हादसे का सबब बन सकती हैं।

लोग परोस रहे हैं चूहों को दावत
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि चूहों की इतनी बड़ी आबादी का मुख्य कारण वहां मिलने वाला मुफ्त का खाना है। तालाब किनारे घूमने आने वाले लोग अक्सर चूहों को रोटी, मुरमुरे और दाल जैसी चीजें खाने को डाल देते हैं। गंदगी और लगातार मिल रहे भोजन की वजह से इन चूहों ने यहां अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है और इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है।
एक्सपर्ट की राय: सफाई ही एकमात्र समाधान
जानकारों का कहना है कि जब तक इन चूहों को खाना मिलना बंद नहीं होगा, इन्हें यहां से हटाना नामुमकिन है। तालाब के किनारे पत्थर लगाने (पिचिंग) का काम तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक चूहे अंदर से जमीन को खोखला करना बंद न करें। इसके लिए सबसे जरूरी है कि लोग तालाब किनारे कचरा और खाने का सामान डालना बंद करें। अगर वहां पूरी तरह सफाई रहेगी, तो चूहे खुद-ब-खुद वहां से भाग जाएंगे।

नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि वे तालाब के किनारों से चूहों को हटाने के लिए एक विशेष कार्ययोजना बना रहे हैं। सबसे पहले तालाब किनारे जमे कचरे और गाद को साफ किया जाएगा ताकि चूहों के छिपने की जगह खत्म हो सके। इसके बाद सुरक्षित तरीके से चूहों को वहां से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे सौंदर्यीकरण कार्य को बचाया जा सके।