23 अप्रैल 2026
भोपाल:
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने राज्य में समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं खरीदी का कोटा बढ़ा दिया है। अब मध्य प्रदेश में 1 करोड़ टन गेहूं की खरीदी की जाएगी। पहले यह लक्ष्य कम था, लेकिन राज्य सरकार की कोशिशों के बाद केंद्र ने इसमें 22 लाख टन की बढ़ोतरी कर दी है।
डॉ. मोहन यादव और शिवराज सिंह की कोशिशें लाईं रंग
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों के हित में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कोटा बढ़ाने की मांग की थी। इस मुहिम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने दिल्ली में केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी से चर्चा की और मध्य प्रदेश के किसानों की समस्या को प्रमुखता से रखा।
नतीजा यह हुआ कि केंद्र सरकार ने राज्य की मांग को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त गेहूं खरीदने की अनुमति दे दी। अब प्रदेश के करीब 19.40 लाख किसान लाभान्वित होंगे जिन्होंने समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन कराया है।
गेहूं का दाम और बोनस का गणित
सरकार इस बार गेहूं की खरीदी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही है। इसमें 2,275 रुपये का न्यूनतम समर्थन मूल्य और राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला 125 रुपये का अतिरिक्त बोनस (प्रोत्साहन राशि) शामिल है। मंडियों में फिलहाल गेहूं के भाव 2,300 से 2,400 रुपये के आसपास चल रहे हैं, ऐसे में सरकारी खरीदी केंद्रों पर बेचना किसानों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है।
बारदाना खरीदी में ‘घोटाले’ की गूंज: टेंडर में धांधली का आरोप
एक तरफ जहां खरीदी का कोटा बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ बारदाना (बोरे) खरीदी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जबलपुर के पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने बारदाना खरीदी के टेंडर में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
विवाद की मुख्य बातें:
दोगुने दाम पर टेंडर: आरोप है कि अफसरों की मिलीभगत से पुराने बारदाने को ऊंचे दामों पर खरीदने की तैयारी थी। पहले जो बारदाना 54.20 रुपये प्रति बोरा तय किया गया था, वह शिकायत के बाद दोबारा टेंडर होने पर घटकर 37.20 रुपये पर आ गया।
80 करोड़ के हेरफेर की आशंका: विधायक का दावा है कि अगर समय रहते गड़बड़ी नहीं पकड़ी जाती, तो सरकारी खजाने को करीब 80 करोड़ रुपये का चूना लग सकता था।
अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग: मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शिकायत मिलने के बाद पुराने टेंडर को निरस्त कर दिया था। हालांकि, विधायक विश्नोई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर नाराजगी जताई है कि टेंडर मैनेज करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई है।
स्लॉट बुकिंग में आ रही दिक्कतें
खरीदी केंद्रों पर भारी भीड़ और तकनीकी समस्याओं के कारण किसानों को ‘स्लॉट बुकिंग’ (खरीदी का समय तय करना) में भी परेशानी हो रही है। कई केंद्रों पर क्षमता से अधिक पंजीयन होने के कारण पोर्टल पर स्लॉट नहीं मिल पा रहे हैं। भारतीय किसान संघ ने भी इस समस्या को लेकर प्रशासन से शिकायत की है और मांग की है कि खरीदी की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए ताकि बारिश से पहले किसान अपनी फसल बेच सकें।


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