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29 अप्रैल 2026
भोपाल:

राजधानी में गोकशी के मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ ‘अस्लम चमड़ा’ को जेल से रिहाई मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इस फैसले से स्थानीय हिंदू संगठनों में भारी नाराजगी है। संगठन ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को शांत नहीं बैठने देंगे और न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला नगर निगम के स्लॉटर हाउस से जुड़े मांस के नमूनों में गोमांस की पुष्टि होने के बाद शुरू हुआ था। इस मामले में पुलिस ने असलम कुरैशी को मुख्य आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था। आरोपी लगभग 70 दिनों तक जेल में रहा, जिसके बाद उसे सत्र न्यायालय (Session Court) से जमानत मिल गई थी।
हालांकि, जेल से बाहर आते ही पुलिस ने उसे दोबारा हिरासत में ले लिया और अगले ही दिन एनएसए (NSA) के तहत कार्रवाई करते हुए फिर से जेल भेज दिया। लेकिन अब हाई कोर्ट की एडवाइजरी कमेटी ने एनएसए के तहत की गई इस कार्रवाई को रद्द कर दिया है, जिसके चलते असलम भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा हो गया है।
हिंदू संगठन क्यों हैं नाराज?
‘जय मां भवानी’ हिंदू संगठन ने इस रिहाई पर कड़ा विरोध जताया है। संगठन के अध्यक्ष भानु हिंदू का कहना है कि प्रशासन और पुलिस की ढीली कार्यप्रणाली के कारण एक गंभीर अपराधी को राहत मिली है।
संगठन के मुख्य आरोप:
पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने और कानूनी प्रक्रियाओं में लापरवाही बरती है।
गोवंश संरक्षण जैसे संवेदनशील और सामाजिक आस्था से जुड़े मामले में जैसी सख्ती दिखानी चाहिए थी, वैसी नहीं दिखाई गई।
सिस्टम की इसी ढिलाई की वजह से आरोपियों के हौसले बुलंद होते हैं।
अब आगे क्या?
हिंदू संगठन ने ऐलान किया है कि वे इस कानूनी लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे पुलिस की कार्यप्रणाली को भी शीर्ष अदालत में चुनौती देंगे। संगठनों का मानना है कि गोकशी जैसे अपराधों में कड़ी सजा होनी चाहिए ताकि समाज में एक सख्त संदेश जाए।

मछली परिवार मामले में भी पुलिस पर सवाल
इसी बीच, राजधानी के चर्चित ‘मछली परिवार’ केस में भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भोपाल पुलिस पर नकेल कसी है। आयोग के सदस्य ने पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यासीन अहमद उर्फ यासीन मछली और उसके परिवार से जुड़े मामलों में पुलिस की जांच संतोषजनक नहीं लग रही है, जिससे अब यह मामला और गरमाता जा रहा है।


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