4 मई 2026
भोपाल:
मध्य प्रदेश में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्य शासन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए राज्य महिला आयोग में नई नियुक्तियां कर दी हैं। छतरपुर जिले के मलहरा क्षेत्र की पूर्व विधायक रेखा यादव को मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।
साधना स्थापक को मिली सदस्य की जिम्मेदारी
अध्यक्ष पद के साथ-साथ आयोग के अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी नियुक्तियां की गई हैं। नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा सीट से पूर्व विधायक साधना स्थापक को आयोग में सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। ये नियुक्तियां राज्य सरकार द्वारा निगम-मंडलों और आयोगों में की जा रही राजनीतिक नियुक्तियों के क्रम का हिस्सा हैं।
कौन हैं नई अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक?
नवनियुक्त पदाधिकारियों का राजनीति में लंबा अनुभव रहा है:
* रेखा यादव: वर्ष 2008 में छतरपुर की मलहरा सीट से विधायक चुनी गई थीं। वे पार्टी के पिछड़ा वर्ग मोर्चा में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।
* साधना स्थापक: साधना स्थापक गाडरवारा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं और वे तीन बार विधायक रह चुकी हैं। उनके अनुभव का लाभ प्रदेश की महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में मिलेगा।
6 साल से क्यों अटका था काम?
राज्य महिला आयोग में नियुक्तियों का मामला पिछले 6 साल से उलझा हुआ था। इसके पीछे की कहानी कुछ इस तरह है:
* साल 2020 का विवाद: तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने शोभा ओझा को अध्यक्ष नियुक्त किया था। लेकिन सरकार बदलने के बाद शिवराज सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया था।
* कानूनी लड़ाई: पद से हटाए जाने के बाद शोभा ओझा न्यायालय चली गई थीं, जिसकी वजह से नई नियुक्तियों का रास्ता रुक गया था।
* इस्तीफा: लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 24 जून 2022 को शोभा ओझा ने स्वयं अपने पद से इस्तीफा देने की बात कही थी। तब से आयोग में कोई नई नियुक्ति नहीं हो पाई थी।
आयोग के सामने चुनौतियां और काम
6 साल बाद अध्यक्ष और सदस्य मिलने से अब आयोग में पेंडिंग पड़े हजारों मामलों की सुनवाई होने की उम्मीद जगी है। घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों के निराकरण में अब तेजी आएगी।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इन नियुक्तियों से न केवल महिलाओं से जुड़े मामलों का निपटारा होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।


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