4 मई 2026
इंदौर:
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को 2360 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनने वाले ‘इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के पहले चरण का भूमिपूजन नैनोद में किया। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए ‘भाग्य उदय का शंखनाद’ बताया है।
किसानों के लिए वरदान बनी योजना
इस कॉरिडोर की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए जमीन देने वाले किसान खुद इस विकास के भागीदार बने हैं।
1. करोड़ों के मालिक बने किसान: योजना के कारण कई स्थानीय किसान रातों-रात करोड़पति बन गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों को उनके सहयोग के बदले 650 करोड़ रुपये के विकसित प्लॉट दिए गए हैं।
2. जमीन की नई नीति: सरकार ने किसानों को उनकी जमीन का 60 प्रतिशत हिस्सा विकसित भूखंड के रूप में लौटाने का फैसला लिया है, जिससे किसान सीधे तौर पर शहर के विस्तार और विकास का हिस्सा बन रहे हैं।
3. सम्मान और खुशी: मुआवजे के फैसले से खुश किसानों ने मुख्यमंत्री का सम्मान किया और उन्हें प्रतीक स्वरूप हल और मुकुट भेंट किया।
यह इकोनॉमिक कॉरिडोर न केवल इंदौर बल्कि आसपास के जिलों की तस्वीर बदल देगा। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
यह कॉरिडोर सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर तक करीब 20.28 किलोमीटर लंबा होगा।
यह पूरी परियोजना 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
मुख्य सड़क 75 मीटर चौड़ी होगी, जिसके दोनों तरफ बफर जोन बनाए जाएंगे।
यह कॉरिडोर सीधे नेशनल हाईवे 47 (NH-47) और नेशनल हाईवे 52 (NH-52) से जुड़ा होगा।
मेट्रोपॉलिटन रीजन की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर एक बड़े विजन की बात भी कही। उन्होंने बताया कि इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुर और रतलाम को जोड़कर एक बड़ा ‘मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र’ विकसित किया जा रहा है। इस कॉरिडोर से क्षेत्र में औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस मौके पर कहा कि यह देश की पहली ऐसी योजना है जिसमें किसान अपनी जमीन देने के लिए खुद आगे आए और खुशी-खुशी विकास का हिस्सा बने। यहां आने वाले समय में ‘ग्रीन इंडस्ट्री’ विकसित होगी जो पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन बनाए रखेगी।


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