19 मई 2026

कोलकाता:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य की सत्ता संभालते ही नव-निर्वाचित भाजपा सरकार ने दशकों पुरानी राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को बदलने की दिशा में कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की दूसरी बैठक में एक ऐसा फैसला लिया गया है, जिसने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। नई सरकार ने साफ कर दिया है कि पुरानी सरकार के वोट बैंक वाले ढर्रे को पूरी तरह खत्म किया जाएगा। इसी के तहत धर्म के आधार पर चलाई जा रही सभी वित्तीय सहायता योजनाओं को तुरंत प्रभाव से बंद करने का आदेश दे दिया गया है। इसे बंगाल की राजनीति में एक बड़े वैचारिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

अगले महीने से बंद हो जाएगा इमामों, मुअज्जिनों और पुरोहितों का मासिक भत्ता
नई सरकार के इस कड़े फैसले के बाद अगले महीने से इमामों, मुअज्जिनों और हिंदू पुरोहितों को मिलने वाला सरकारी मासिक भत्ता पूरी तरह बंद हो जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ किया है कि अब धार्मिक आधार पर बनी कल्याणकारी संस्थाओं या प्राधिकरणों में कोई भी नई सरकारी नियुक्ति नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि सरकारी योजनाओं और भत्तों का आधार धार्मिक पहचान बिल्कुल नहीं होना चाहिए।

ये थीं ममता सरकार की वो योजनाएं जिन पर लगी रोक
यह मासिक भत्ता योजना पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की सबसे प्रमुख योजनाओं में से एक थी। इसकी शुरुआत साल 2012 में हुई थी, जब पंजीकृत इमामों और मुअज्जिनों के लिए मासिक भत्ते की घोषणा की गई थी। बाद में यह मामला हाईकोर्ट तक भी पहुँचा, जिसके बाद इस राशि को वक्फ बोर्ड के माध्यम से दिया जाने लगा। इसके बाद जब चारों तरफ से आलोचनाएं होने लगीं, तो ममता सरकार ने साल 2020 में हिंदू पुजारियों और पुरोहितों के लिए भी मासिक भत्ते का ऐलान कर दिया। साल 2024 के मार्च महीने में इस भत्ते की राशि को और बढ़ा दिया गया था, जिसके तहत इमामों को 3,000 रुपये, मुअज्जिनों व पुजारियों को 2,000 रुपये महीना दिया जा रहा था। नई सरकार ने अब इन सभी भत्तों को पूरी तरह बंद कर दिया है।

दुर्गा पूजा अनुदान को लेकर भी बनी संशय की स्थिति
पुरानी सरकार के समय राज्य की लगभग 43 हजार से ज्यादा दुर्गा पूजा समितियों को 1.10 लाख रुपये का सरकारी अनुदान दिया जाता था। इसके साथ ही बिजली के बिल में भी 80 प्रतिशत की भारी छूट मिलती थी। नई सरकार ने फिलहाल इस अनुदान को लेकर अपना कोई रुख साफ नहीं किया है और न ही कोई नई प्रतिक्रिया दी है। इस वजह से राज्य के पूजा आयोजकों के बीच अभी असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है।

ओबीसी (OBC) सूची में भी होने जा रहा है बड़ा फेरबदल
कैबिनेट बैठक में केवल भत्ते ही बंद नहीं किए गए, बल्कि ओबीसी आरक्षण को लेकर भी एक बड़ा फैसला लिया गया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के साल 2024 के फैसले को आधार बनाते हुए नई सरकार ने मौजूदा ओबीसी सूची को रद्द करने और उसमें संशोधन करने का निर्णय लिया है। दरअसल, पिछली तृणमूल सरकार के दौरान ओबीसी लिस्ट में 77 नई कम्युनिटीज को शामिल किया गया था, जिनमें से करीब 75 मुस्लिम समुदाय से थीं। अदालत ने इस फैसले को अमान्य घोषित कर दिया था, जिसकी वजह से करीब पांच लाख ओबीसी सर्टिफिकेट रद्द हो गए थे। अब नई सरकार ओबीसी आरक्षण की पात्रता और नए नियमों को तय करने के लिए एक विशेष नई समिति का गठन करने जा रही है।

खाली खजाने को संजीवनी देने की कोशिश
जानकारों का मानना है कि बंगाल के लिए यह कदम आर्थिक और राजनीतिक दोनों ही नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण है। इस समय पश्चिम बंगाल सरकार पर करीब सवा सात लाख करोड़ रुपये का भारी कर्ज है। ऐसे में राज्य को कर्ज के दलदल से निकालने और खाली हो चुके सरकारी खजाने को दोबारा भरने के लिए इस फैसले को एक संजीवनी की तरह देखा जा रहा है। भाजपा का कहना है कि यह फैसला उनके उस नारे की शुरुआत है, जिसमें उन्होंने चुनाव से पहले जनता से ‘भत्ता नहीं, भात और सुशासन’ का वादा किया था।

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