19 मई 2026
नई दिल्ली:
भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति और मजबूत इरादों का प्रदर्शन किया है। अमेरिका की तरफ से रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट की मियाद खत्म होने के बाद भी भारत ने साफ कह दिया है कि वह रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद नहीं करेगा। सरकार ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया है कि अमेरिका चाहे प्रतिबंध हटाए या उन्हें लगाकर रखे, भारत अपने देश की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल की खरीद जारी रखेगा।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली छूट आगे बढ़ती है या नहीं, इससे भारत के फैसले पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। भारत किसी भी बाहरी दबाव में आए बिना, सिर्फ अपनी घरेलू और व्यावसायिक जरूरतों के आधार पर ही तेल खरीद से जुड़े फैसले लेता रहेगा।
क्यों चर्चा में है यह मामला?
दरअसल, साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत ने रूस से बड़े पैमाने पर सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया था। कुछ ही महीनों में भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी महज 0.02 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत तक पहुँच गई थी। अमेरिका इस बात से लगातार नाराज था और भारत पर रूस से तेल न खरीदने का दबाव बना रहा था। अमेरिका का तर्क है कि रूस तेल बेचकर मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल युद्ध में कर रहा है।
बाद में डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ लगाने की धमकी भी दी थी, जिसके कारण नवंबर-दिसंबर 2025 में भारत ने रूस से तेल की खरीद थोड़ी कम कर दी थी। लेकिन हाल ही में ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (समुद्री रास्ते) में आए संकट के चलते जब पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित होने लगी, तो अमेरिका ने मार्च 2026 में भारत को प्रतिबंधों से 30 दिनों की अस्थायी छूट दी थी। इस छूट को बाद में बढ़ाकर 16-17 मई, 2026 तक किया गया था, जिसकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है।
तेल कंपनियों को रोजाना हो रहा है 750 करोड़ रुपये का भारी घाटा
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी एक बड़ी जानकारी सामने आई है। संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि देश की तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री पर रोजाना लगभग 750 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस भारी घाटे की वजह से आने वाले दिनों में आम जनता पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ पड़ सकता है।
इससे पहले तेल कंपनियों ने देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। उस समय तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया था कि तेल कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। उन्होंने कंपनियों को अगले दो महीनों के भीतर इस घाटे को कम करके करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये की रिकवरी करने के निर्देश भी दिए थे। फिलहाल विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि छूट की अवधि को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी प्रशासन से बातचीत भी जारी है, लेकिन भारत का रुख अपनी जरूरतों को लेकर पूरी तरह साफ है।


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