22 मई 2026
भोपाल:
भोपाल के अयोध्या बायपास को मिली हरी झंडी!
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के विकास से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। शहर के सबसे व्यस्त रास्तों में से एक, अयोध्या बायपास को 10 लेन का बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी की नई दिल्ली बेंच से मंजूरी मिल गई है। इस फैसले के बाद अब इस हाईवे के चौड़ीकरण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि, एनजीटी ने इसके साथ ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एनएचएआई के सामने पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी कुछ बेहद सख्त शर्तें भी रखी हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।
पर्यावरणविद् की याचिका पर आया एनजीटी का फैसला
इस पूरी परियोजना को लेकर भोपाल के जाने-माने पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना ने एनजीटी में एक याचिका दायर की थी। इस याचिका में उन्होंने प्रोजेक्ट के कारण बड़े पैमाने पर होने वाली पेड़ों की कटाई का कड़ा विरोध किया था। याचिका में चिंता जताई गई थी कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ कटने से भोपाल के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचेगा और शहर के तापमान में भी तेजी से बढ़ोतरी होगी।
इस गंभीर मामले की सुनवाई जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और अन्य विशेषज्ञ सदस्यों की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने माना कि भोपाल में लगातार बढ़ते ट्रैफिक के दबाव, आए दिन लगने वाले जाम और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अयोध्या बायपास का चौड़ीकरण बेहद जरूरी है। इसके साथ ही एनएचएआई की तरफ से बताया गया कि पेड़ काटने के लिए जरूरी सरकारी अनुमतियां पहले ही ली जा चुकी हैं और पर्यावरण नियमों के तहत इसके बदले में बड़े पैमाने पर नए पौधे भी लगाए जाएंगे।
लगाए जाने वाले पौधों की 15 साल तक होगी कड़ी निगरानी
एनजीटी ने इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा के लिए एक ठोस योजना बनाने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि ग्रीन हाईवे नीति के तहत पौधे लगाने और उनके संरक्षण का काम पूरी जिम्मेदारी से किया जाना चाहिए।
सबसे खास बात यह है कि इन नए पौधों की देखभाल केवल कुछ दिनों के लिए नहीं होगी, बल्कि पूरे 15 साल तक इनकी निगरानी की जाएगी। इसके लिए वन विभाग, नगर निगम, उद्यानिकी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक संयुक्त समिति यानी जॉइंट कमेटी बनाई जाएगी। यह कमेटी अगले 15 वर्षों तक लगातार इस बात पर नजर रखेगी कि जो पौधे लगाए गए हैं, वे सुरक्षित हैं और सही तरीके से बढ़ रहे हैं या नहीं।
इस फैसले से साफ है कि भोपाल वासियों को जल्द ही जाम से मुक्ति तो मिलेगी, लेकिन विकास की इस दौड़ में पर्यावरण की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी।


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