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29 मई 2026

बेंगलुरु।

कर्नाटक की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर काफी समय से चल रही खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धरमैया ने गुरुवार को अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफा सौंपने के बाद प्रेस से बात करते हुए उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस हाईकमान ने उनसे जो कुछ भी करने को कहा, उन्होंने वही किया। उन्होंने बार-बार इस बात को दोहराया कि जब भी आलाकमान का निर्देश आएगा, वह पद छोड़ देंगे और हाईकमान ने दो दिन पहले ही उन्हें यह निर्देश दे दिया था।
इस बड़े सियासी घटनाक्रम के बीच अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि वर्तमान उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

भावुक पल: शिवकुमार ने पैर छूकर लिया सिद्धरमैया का आशीर्वाद
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान मुख्यमंत्री आवास पर एक बेहद भावुक और दिलचस्प नजारा देखने को मिला। इस्तीफा देने से पहले सिद्धरमैया के आवास पर उनके कैबिनेट सहयोगियों के लिए एक विदाई नाश्ते का आयोजन किया गया था। इस दौरान डीके शिवकुमार ने आगे बढ़कर सिद्धरमैया के पैर छुए और उनका आशीर्वाद लिया। इस घटना की तस्वीरें और चर्चाएं इस समय राजनीतिक गलियारों में तेजी से वायरल हो रही हैं।
इस बीच, कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धरमैया के अनुभव को देखते हुए उन्हें दिल्ली बुलाकर राज्यसभा की सदस्यता का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, सिद्धरमैया ने इस प्रस्ताव को बेहद विनम्रता से ठुकरा दिया। उनका कहना है कि वह दिल्ली जाने के बजाय अपने राज्य की राजनीति में ही सक्रिय रहना चाहते हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब दोनों ही नेता नई कैबिनेट के गठन की प्रक्रिया को लेकर आलाकमान से मिलने अलग-अलग गाड़ियों से दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं।
राज्यपाल के शहर से बाहर होने के कारण विशेष सचिव को सौंपा इस्तीफा
सिद्धरमैया अपना इस्तीफा सौंपने के लिए राजभवन पहुंचे थे, लेकिन कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत इस समय राज्य से बाहर हैं। वे शुक्रवार तक बेंगलुरु वापस लौटेंगे। राज्यपाल की अनुपस्थिति के कारण सिद्धरमैया ने लोकभवन में राज्यपाल के विशेष सचिव प्रभु शंकर को दोपहर में अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए 77 वर्षीय सिद्धरमैया ने पूरा विश्वास जताया कि राज्यपाल संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उनका इस्तीफा स्वीकार कर लेंगे। इस दौरान उनके साथ उपमुख्यमंत्री और संभावित उत्तराधिकारी डीके शिवकुमार सहित कैबिनेट के अन्य सहयोगी भी मौजूद रहे।
राहुल गांधी के सीधे संदेश के बाद लिया गया फैसला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सिद्धरमैया ने पद छोड़ने का यह बड़ा निर्णय इसलिए लिया क्योंकि यह संदेश सीधे पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी की ओर से आया था। इससे पहले मंगलवार को सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली बुलाया गया था, जहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला के साथ उनकी कई दौर की लंबी बैठकें हुई थीं। इसी बैठक में इस बात पर अंतिम मुहर लगी।

साल 2023 के चुनाव के बाद से ही चल रही थी कुर्सी की रेस
आपको बता दें कि मई 2023 में हुए कर्नाटक विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बड़ी जीत मिली थी। पार्टी ने 224 सदस्यीय विधानसभा में 136 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद के लिए सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही थी। उस समय पार्टी ने बीच का रास्ता निकालते हुए शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए मनाया था।
सूत्रों के अनुसार, उस वक्त दोनों नेताओं के बीच समय-बारी यानी ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनने की व्यवस्था पर आंतरिक सहमति बनी थी, हालांकि पार्टी या दोनों नेताओं ने कभी भी सार्वजनिक रूप से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया था। डीके शिवकुमार और उनका खेमा लगातार पार्टी से मांग कर रहा था कि साल 2023 में चुनाव जीत के समय जो वादा किया गया था, उसे निभाया जाए। सिद्धरमैया ने भी तब कहा था कि अगर पार्टी आलाकमान इस्तीफा देने को कहेगा तो वह तुरंत पद छोड़ देंगे।
सिद्धरमैया का मुख्यमंत्री के रूप में एक लंबा और शानदार रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने साल 2013 से 2018 तक मुख्यमंत्री का पूरा पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था और 20 मई को उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल के तीन वर्ष भी पूरे कर लिए थे, जिसके बाद अब उन्होंने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा दिखाते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का हार्दिक आभार व्यक्त किया है।


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