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30 मई 2026

नई दिल्ली:


नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए (NTA) की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर और कड़े सवाल उठाए हैं। अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि परीक्षा प्रणाली में अगर जवाबदेही तय नहीं होती है, तो ऐसी गड़बड़ियों और घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने एनटीए को नसीहत देते हुए कहा कि उसे संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी संस्थाओं से सबक लेना चाहिए और अपनी व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के सामने इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें परीक्षा के आयोजन और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के पूरे ढांचे में व्यापक बदलाव करने या उसके स्थान पर एक नई और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। अदालत का मानना है कि केवल नियम बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि उन नियमों का सही और प्रभावी ढंग से पालन करवाना और परीक्षा संचालन की विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। अदालत ने कहा कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की चूक को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

एनटीए ने कोर्ट में दिया हलफनामा: भविष्य में सुधार के लिए उठाए कई कदम
देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में पिछले कुछ समय में हुए विवादों को देखते हुए एनटीए ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। एजेंसी ने अदालत को भरोसा दिलाया है कि वह भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई बड़े कदम उठा रही है।
एनटीए के अनुसार, विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा संचालन, निगरानी और सुरक्षा से जुड़े कई नए कड़े नियम लागू किए गए हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है, ताकि भविष्य में पेपर लीक या किसी भी तरह की धांधली की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म किया जा सके और परीक्षार्थियों व उनके अभिभावकों का भरोसा फिर से जीता जा सके।

सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए किए गए ये बड़े बदलाव
सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी: परीक्षा केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब सीसीटीवी कैमरों से लाइव रिकॉर्डिंग की जाएगी। इस रिकॉर्डिंग को कम से कम 90 दिनों तक पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि किसी भी शिकायत या संदेह की स्थिति में उसकी बारीकी से जांच की जा सके।
मॉक ड्रिल का आयोजन: मुख्य परीक्षा के दिन किसी भी गड़बड़ी से बचने के लिए अब परीक्षा से पहले सभी केंद्रों पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। इसके जरिए सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जांच की जाएगी और जो भी कमियां मिलेंगी, उन्हें समय रहते दुरुस्त किया जाएगा।
अधिकारियों की सख्त पहचान: परीक्षा केंद्र से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच और पूरी तरह पहचान सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी बाहरी या संदिग्ध व्यक्ति का दखल रोका जा सके।
आपातकालीन और बुनियादी सुविधाएं: परीक्षा के दिन बिजली कटने या खराब मौसम जैसी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए परीक्षा केंद्रों पर विशेष बिजली बैकअप (जनरेटर) और चिकित्सा सुविधाओं की पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

हाई कोर्ट्स के लिए भी सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश
इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने देश के उच्च न्यायालयों (हाई कोर्ट्स) द्वारा फैसला सुरक्षित रखने और उसे सुनाने में होने वाली देरी पर भी एक बड़ा आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से मौजूद है कि कोई भी हाई कोर्ट सुनवाई पूरी होने के बाद अधिकतम 3 महीने तक ही फैसला सुरक्षित रख सकती है। अगर 3 महीने के भीतर फैसला नहीं आता है, तो रजिस्ट्रार जनरल उस मामले को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के सामने रखेंगे। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना, जस्टिस एमएम सुंदरेश, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिसरा की पीठ ने कहा कि जमानत के मामलों में तो यह और भी जरूरी है कि आदेश उसी दिन या फिर अगले दिन जरूर सुना दिया जाए। अदालत ने निर्देश दिया है कि बहस पूरी होने के बाद सभी हाई कोर्ट अपनी वेबसाइट पर फैसला सुरक्षित रखने की तारीख स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें।


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