2 June 2026: खबर प्रधान डेस्क:
भारतीय सेना अपनी सीमाओं की सुरक्षा और दुश्मन पर सटीक नजर रखने की क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है। इसी कड़ी में एक बड़ा कदम उठाते हुए स्वदेशी स्टार्टअप कंपनी ‘होवरित’ द्वारा बनाए गए ‘दिव्यास्त्र एमके-1’ लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन का सफल परीक्षण किया गया है। जोधपुर में युद्ध स्तरीय परिस्थितियों के बीच वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में इस ड्रोन ने अपनी बेजोड़ क्षमता का प्रदर्शन किया।
यह तकनीक सेना के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। अब तक सेना को खुफिया जानकारी जुटाने, घुसपैठ पर नजर रखने और फिर लक्ष्य पर हमला करने के लिए अलग-अलग उपकरणों और संसाधनों का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन ‘दिव्यास्त्र एमके-1’ इन सभी क्षमताओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। यूक्रेन-रूस और अमेरिका-इरान युद्ध में लोइटरिंग म्यूनिशन ड्रोन की सफलता को देखते हुए भारतीय सेना अब विदेशी प्रणालियों के बजाय इस तरह की किफायती स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा दे रही है।
निगरानी और हमला एक साथ, 15 किलो का बम ले जाने की ताकत
दिव्यास्त्र एमके-1 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल निगरानी तक सीमित नहीं है। जैसे ही इसे लक्ष्य की पहचान होती है और सही अवसर मिलता है, यह तुरंत कार्रवाई कर सकता है। इसी वजह से इसे ‘लोइटरिंग म्यूनिशन’ श्रेणी का ड्रोन यानी ‘कामिकेज़ ड्रोन’ या ‘सुसाइड ड्रोन’ भी कहा जाता है। यह अपने साथ करीब 15 किलोग्राम तक का भारी विस्फोटक (वारहेड) लेकर उड़ सकता है और सटीक निशाना लगाते हुए दुश्मन का खात्मा कर सकता है।
इस ड्रोन की तकनीकी खासियतें इसे बेहद खतरनाक बनाती हैं:
रफ्तार और रेंज: यह ड्रोन हवा में करीब 300 से 400 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है और इसकी अधिकतम रफ्तार 500 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकती है।
उड़ान का समय: यह लगातार पांच घंटे तक हवा में रहकर उड़ान भर सकता है और लंबे समय तक मंडरा सकता है।
दुर्गम इलाकों में उपयोगी: यह लगभग 500 किलोमीटर तक के क्षेत्र की निगरानी कर सकता है, जिससे पहाड़ी क्षेत्रों और घने जंगलों जैसे कठिन भूगोल में भी इसका उपयोग बेहद प्रभावी माना जा रहा है।
रियल-टाइम जानकारी और एडवांस्ड फीचर्स:
यह नया सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक सेंसर से लैस है, जिसके कारण यह प्रणाली दिन और रात दोनों समय पूरी सटीकता के साथ काम करती है। एडवांस्ड सेंसर की मदद से यह ड्रोन मोबाइल लॉन्चर से छूटते ही दिन-रात की परवाह किए बिना काम पर लग जाता है और सीधे कमांड सेंटर तक रियल-टाइम जानकारी पहुंचाता है।
एक और महत्वपूर्ण बदलाव इसकी मोबाइल लॉन्च क्षमता है। इसे किसी ट्रक या अन्य वाहन पर लादकर आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जा सकता है। युद्ध या सीमा पर हालात तेजी से बदलने की स्थिति में सेना की जरूरत के मुताबिक इसे किसी भी स्थान से तुरंत तैनात किया जा सकेगा। इसे तैयार करने और उड़ान भरने में बहुत कम समय लगता है।
होवरित के तरकश में कई और स्वदेशी ड्रोन:
होवरित कंपनी फिलहाल केवल इसी प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। कंपनी सैन्य और सुरक्षा एजेंसियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर कई तरह के सामरिक और निगरानी ड्रोन विकसित कर रही है, जिनकी जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर दी गई है।
कंपनी के अनुसार, फिलहाल ‘दिव्यास्त्र एमके-2’ पर भी काम चल रहा है। यह इस श्रृंखला का अगला वेरिएंट होगा, जिसकी यूएवी दूरी और भी लंबी होगी। इसके अतिरिक्त कंपनी के पोर्टफोलियो में ‘बाज’, ‘आरव’ और ‘रफ्तार’ नाम के ड्रोन भी शामिल हैं। इनमें से ‘बाज’ ड्रोन 15 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है और इसकी उड़ान क्षमता 2000 किलोमीटर तक बताई गई है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में निगरानी और मिशन संचालन की क्षमता काफी बढ़ जाती है। ‘होवरित’ के इन ड्रोन्स में वर्टिकल टेक-ऑफ की भी खासियत है, जिससे ये सीधे जमीन से हवा में लॉन्च किए जा सकते हैं।


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