5 जून 2026 :खबर प्रधान डेस्क:
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां ग्राम बादखेड़ी में चल रहे एक मदरसे और कन्या विद्यालय में शिक्षा और रहने की व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर लापरवाही और गड़बड़ियां उजागर हुई हैं.
यह पूरा खुलासा तब हुआ जब मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा ने अपनी टीम के साथ इस संस्थान का अचानक निरीक्षण किया. जांच के दौरान कई ऐसे हैरान करने वाले तथ्य सामने आए, जिसने इस संस्थान के संचालन और इसके रिकॉर्ड्स की पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने जिला शिक्षा विभाग को तुरंत शुरुआती जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
क्या है पूरा मामला और क्या मिलीं गड़बड़ियां?
दरअसल, आयोग की अध्यक्ष ने गुरुवार को दारुल उलूम अहले सुन्नत मोइनिया फैजान ए गरीब नवाज मदरसे और उसी परिसर में चल रहे मोइनिया गर्ल्स स्कूल का बारीकी से निरीक्षण किया था. इस जांच में जो बातें सामने आईं, वे हैरान करने वाली हैं:
रिकॉर्ड और सामान में भारी अंतर:
जांच टीम को पता चला कि इस विद्यालय को मध्य प्रदेश बोर्ड से केवल कक्षा 6 से 8वीं तक के संचालन की मान्यता मिली हुई है. सरकारी ऑनलाइन रिकॉर्ड में यहां सिर्फ 37 छात्राओं का रजिस्ट्रेशन दर्ज है. लेकिन जब स्कूल के स्कॉलर रजिस्टर को देखा गया, तो उसमें 76 छात्राओं के नाम दर्ज पाए गए.
कमरों में मिला एक्स्ट्रा सामान: जब परिसर के कमरों की तलाशी ली गई, तो वहां रिकॉर्ड में दर्ज संख्या से कहीं ज्यादा यानी बड़ी तादाद में स्कूल बैग, कपड़े और दूसरा सामान मिला. इस सामान को देखकर साफ अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां तय संख्या से काफी ज्यादा छात्राएं रह रही थीं.
ऊंची कक्षाओं की किताबें मिलना संदेहास्पद:
स्कूल को केवल 8वीं तक की ही अनुमति है, लेकिन निरीक्षण के दौरान वहां तीसरी से लेकर 12वीं कक्षा तक की किताबें पाई गईं. इन किताबों के मिलने से यह शक गहरा गया है कि यहां मान्यता के बिना ही गुपचुप तरीके से ऊंची कक्षाएं भी चलाई जा रही थीं.
मौके से जिम्मेदार लोग और दस्तावेज गायब
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब इतनी बड़ी जांच चल रही थी, तब संस्था का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी या संचालक वहां मौजूद नहीं था. यही नहीं, जब जांच दल ने छात्राओं की पहचान, उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड, माता-पिता की जानकारी, पहचान पत्र, एडमिशन से जुड़े दस्तावेज और उनके रहने की आवासीय व्यवस्था के कागज मांगे, तो प्रबंधन की तरफ से एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका.
आयोग ने उठाए ये 5 प्रमुख सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के सामने कुछ कड़े सवाल रखे हैं:
- ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्कॉलर रजिस्टर में छात्राओं की संख्या अलग-अलग क्यों है?
- छात्राओं के पहचान पत्र और उनके माता-पिता (अभिभावक) से जुड़े जरूरी दस्तावेज कहां गायब हैं?
- जब मान्यता सिर्फ कक्षा 6 से 8वीं तक की है, तो फिर परिसर में 9वीं से 12वीं जैसी उच्च कक्षाओं की किताबें क्यों रखी हुई थीं?
- इस मदरसे और स्कूल परिसर में असल में कितनी छात्राएं रह रही थीं, इसकी सही जानकारी क्यों छिपाई गई?
- यहां की आवासीय व्यवस्था और पूरे प्रबंधन की आखिरी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
शिक्षा विभाग का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर मंदसौर के जिला शिक्षा अधिकारी टेरेसा मिज ने बताया कि निरीक्षण के दौरान वहां 12वीं कक्षा तक की किताबें मिली हैं. इससे साफ अंदेशा होता है कि संस्थान में मान्यता के बिना भी अवैध रूप से शैक्षणिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं. उन्होंने भरोसा दिया है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.


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