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वाशिंग्टन/ सेंट पिट्सबर्ग
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का बड़ा असर देखने को मिल रहा है. दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियां, अमेरिका और रूस, भारत के साथ अपने रिश्तों और व्यापार को लेकर खुलकर सामने आई हैं. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताते हुए भारत के साथ जल्द ही एक बड़ा व्यापार समझौता होने की उम्मीद जताई है. दूसरी तरफ, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को दो टूक सुनाते हुए कहा है कि भारत पर किसी भी मुद्दे को लेकर दबाव बनाने की कोशिशें पूरी तरह बेकार हैं.
आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं:

डोनाल्ड ट्रंप बोले- ‘मुझे मोदी बहुत पसंद हैं, जल्द होगा बड़ा सौदा’
वाशिंगटन डीसी से मिली खबर के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों पर खुलकर बात की है. ट्रंप ने माना कि उन्होंने पहले भारत से आने वाले सामानों पर ऊंचे आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) लगाए थे और उससे अमेरिका ने अच्छी कमाई भी की, लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं.
ट्रंप ने कहा, “मैं मोदी को बहुत पसंद करता हूँ. मोदी मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं और हमारे संबंध बेहतरीन हैं. हम दोनों एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं.” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में अमेरिकी अधिकारियों की नई दिल्ली में भारत सरकार के साथ अहम बातचीत हुई है. दोनों देश फिलहाल एक अस्थाई व्यापार समझौते पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

व्यापारिक समझौते में क्या हैं मुश्किलें?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर कुछ पेच अभी फंसे हुए हैं:

  • भारत चाहता है कि अमेरिका भारतीय कपड़ों (टेक्सटाइल), हीरे-जेवरात, इंजीनियरिंग सामान, दवाओं और कृषि उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त टैक्स को कम करे.
  • वहीं, अमेरिका चाहता है कि भारत अपने बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों, डेयरी सामान, शराब, मेडिकल उपकरणों और डिजिटल कंपनियों के लिए और ज्यादा खोले.
  • सबसे बड़ा विवाद खेती और किसानी से जुड़े उत्पादों को लेकर है. अमेरिका भारत के बाजार में मक्का, सोयाबीन, बादाम और सेब जैसे उत्पाद ज्यादा मात्रा में बेचना चाहता है, लेकिन भारत को चिंता है कि इससे देश के करोड़ों किसानों की कमाई पर बुरा असर पड़ सकता है.

व्लादिमीर पुतिन का दावा- भारत पर दबाव डालना नामुमकिन
सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के दौरान अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बात करते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत का खुलकर पक्ष लिया. उन्होंने कहा कि अमेरिका, भारत और रूस के बीच के संबंधों को लेकर कई मुद्दों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ऐसी कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी क्योंकि भारत ऐसी ताकतों के आगे नहीं झुकेगा. पुतिन ने कहा कि रूस और भारत मिलकर साझा विकास के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

सुखोई लड़ाकू विमान को लेकर रूस का बड़ा प्रस्ताव
पुतिन ने भारत को अपने सबसे आधुनिक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सुखोई एसयू-57 (Su-57) को लेकर एक बड़ा ऑफर दिया है. उन्होंने इस विमान की तारीफ करते हुए कहा कि यह दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक है. रूस इस विमान को न केवल भारत को बेचने, बल्कि भारत के साथ मिलकर इसका विकास और उत्पादन करने के लिए भी तैयार है. इसके साथ ही रूस अपनी जरूरी रक्षा तकनीकें भी भारत के साथ साझा करने को राजी है.

पहले क्यों ठुकराया गया था सुखोई का प्रस्ताव?
भारत और रूस के बीच रक्षा सौदों का एक पुराना इतिहास रहा है:

  • साल 2018 के आसपास रूस ने भारत को इस सुखोई परियोजना में शामिल होने का न्योता दिया था. उस समय भारत ने रुचि तो दिखाई, लेकिन भारतीय वायुसेना का मानना था कि यह विमान उनकी सभी तकनीकी और युद्धक जरूरतों को पूरा नहीं करता.
    उस दौरान आई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि वायुसेना इसकी लड़ाकू क्षमताओं से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी और दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (तकनीक हस्तांतरण) को लेकर भी मतभेद थे.
    इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने पिछले साल पीएम मोदी की व्हाइट हाउस यात्रा के दौरान भारत को अपने अत्याधुनिक एफ-35 (F-35) लड़ाकू विमान की पेशकश भी की थी.

भारत और चीन के रिश्तों पर पुतिन का रुख
जब पुतिन से भारत और चीन के सीमा विवाद के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि भारत और चीन के रिश्ते बेहद संवेदनशील और जटिल हैं, इसलिए रूस इस मामले में कोई दखल नहीं देना चाहता. उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आपस में बातचीत के जरिए सीमा विवाद समेत सभी गंभीर मुद्दों का हल निकालने में सक्षम हैं. उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत और चीन, दोनों के ही रूस के साथ रिश्ते बिल्कुल अलग-अलग और पूरी तरह स्वतंत्र हैं.


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