11 June 2026
मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म निर्वाचन अधिकारी ने रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद कांग्रेस में एक तरफ जहां भारी नाराजगी है और वो दिल्ली में चुनाव आयोग के दरवाजे पर पहुंच गई है, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अंदर से ही बगावती सुर भी उठने लगे हैं।
चुनाव आयोग पहुंची कांग्रेस, कहा – न्याय नहीं मिला तो जाएंगे सुप्रीम कोर्ट
मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज होने के तुरंत बाद कांग्रेस का एक हाई-लेवल डेलिगेशन बुधवार को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों से मिलने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और देश के जाने-माने वकील व कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी कर रहे थे। उनके साथ महासचिव जयराम रमेश भी मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर निर्वाचन अधिकारी के फैसले को पूरी तरह गैर-कानूनी, मनमाना और अलोकतांत्रिक बताया।
कांग्रेस नेताओं ने साफ कहा है कि अगर उन्हें चुनाव आयोग से न्याय नहीं मिलता है, तो वे इस फैसले के खिलाफ तुरंत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और मामले की जल्द सुनवाई की मांग करेंगे।
अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाए कानूनी सवाल
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने मीडिया से बातचीत में निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर कई कानूनी सवाल खड़े किए। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए का हवाला देते हुए समझाया कि किसी भी उम्मीदवार को केवल उन आपराधिक मामलों की जानकारी देना जरूरी होता है, जिनमें उसे दो साल या उससे ज्यादा की सजा हो चुकी हो या फिर अदालत में उन पर आरोप (चार्ज) तय किए जा चुके हों।
सिंघवी ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई मामला लंबित नहीं है। अदालत से उन्हें केवल एक शुरुआती नोटिस मिला था, जिसमें यह पूछा गया था कि कोर्ट इस मामले का संज्ञान ले या नहीं। कानूनन जब तक कोर्ट संज्ञान नहीं ले लेता, तब तक कोई आपराधिक मामला शुरू ही नहीं माना जाता। मजिस्ट्रेट ने अभी इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने इसे लंबित मामला मानकर पर्चा खारिज कर दिया, जो कि बिल्कुल गलत है। उन्होंने मांग की कि चुनाव आयोग तुरंत हस्तक्षेप करके इस फैसले को निरस्त करे।
बीजेपी के तीनों प्रत्याशी निर्विरोध चुने जाने के करीब
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने बुधवार शाम को बचे हुए प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है। अब मैदान में केवल तीन प्रत्याशी बचे हैं और ये तीनों ही बीजेपी के हैं – तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट।
अगर गुरुवार दोपहर तीन बजे तक (नाम वापसी के तय समय तक) चुनाव आयोग या कोर्ट से कांग्रेस को कोई राहत नहीं मिलती है, तो बीजेपी के इन तीनों प्रत्याशियों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया जाएगा और उन्हें जीत का सर्टिफिकेट भी सौंप दिया जाएगा।
घर में ही घिरी कांग्रेस: पूर्व विधायक ने पूछा – यह चूक है या फिक्सिंग?
एक तरफ जहां कांग्रेस दिल्ली में कानूनी लड़ाई लड़ रही है, वहीं मध्य प्रदेश में पार्टी के अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आ गए हैं। राजगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधायक पुरुषोत्तम दांगी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी पर तीखे सवाल उठाए हैं।
बुधवार को जिला मुख्यालय पर आयोजित कांग्रेस के उपवास कार्यक्रम से दूरी बनाने के बाद, पुरुषोत्तम दांगी ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि ग्राम पंचायत के चुनावों में भी लोग डमी उम्मीदवार खड़ा कर देते हैं। लोकसभा चुनाव में इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी ने नाम वापस ले लिया और अब राज्यसभा चुनाव में नामांकन ही निरस्त हो गया। दांगी ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चुनावी रणनीति नहीं बना रहे, बल्कि कोई ‘प्रयोगशाला’ चला रहे हैं।
विधायकों को कर्नाटक भेजने की तैयारी पर भी उठाए सवाल
पूर्व विधायक दांगी ने यह भी खुलासा किया कि पार्टी ने बुधवार सुबह सभी विधायकों को हवाई जहाज से बेंगलुरु (कर्नाटक) भेजने की पूरी तैयारी कर ली थी। दोपहर 12 बजे तक सभी विधायक जाने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्हें आखिरी वक्त पर एयरपोर्ट के रनवे पर ही रोक दिया गया। उन्हें तब तक वहीं रोके रखा गया जब तक कि मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म निरस्त होने की पक्की खबर नहीं आ गई।
दांगी ने सवाल उठाया कि जब विधायकों का सारा खर्चा खुद पार्टी ही उठा रही थी, तो फिर उनके फॉर्म निरस्त होने की खबर आते ही यात्रा क्यों रद्द कर दी गई? क्या नेताओं को पहले से पता था कि फॉर्म निरस्त होने वाला है? उन्होंने साफ तौर पर पूछा कि यह सिर्फ एक लापरवाही वाली चूक है या फिर इसके पीछे कोई सोची-समझी फिक्सिंग चल रही है।
प्रदेश कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता जीतू पटवारी ने भी मीडिया से कहा है कि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला कानून की धज्जियां उड़ाने वाला है और पार्टी इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी। बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी और आपसी अविश्वास को एक बार फिर से चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।


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