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13 June 2026

भोपाल:
मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता यानी एटीएस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देश विरोधी गतिविधियों में शामिल दो युवकों को गिरफ्तार किया है।

सुरक्षा एजेंसियों ने यह कार्रवाई मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के काजीकैंप और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर इलाके में की है। पकड़े गए दोनों आरोपियों पर देश के खिलाफ साजिश रचने और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त होने का गंभीर आरोप है।

एटीएस ने भोपाल के काजीकैंप इलाके से चौंतीस वर्षीय मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद फराज को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे सोलह जून तक एटीएस की हिरासत में भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस हिरासत में उससे लगातार पूछताछ की जा रही है। वहीं, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से पकड़े गए दूसरे आरोपी नईम अब्दुल्ला की गिरफ्तारी की जानकारी को अभी सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं किया है।

जांच में यह बात सामने आई है कि ये दोनों आरोपी पिछले छह सालों से लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे। ये दोनों भारत में रहकर पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहे थे। एटीएस को छानबीन के दौरान आरोपी फराज के मोबाइल फोन से कई ऐसे आपत्तिजनक दस्तावेज मिले हैं जो सीधे पाकिस्तान से भेजे गए थे।

सूत्रों के मुताबिक, फराज पाकिस्तान और अन्य देशों के जिहादी व्हाट्सएप ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। वह इन ग्रुप्स के जरिए मध्य प्रदेश के स्थानीय युवाओं का एक नेटवर्क तैयार कर रहा था ताकि उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में शामिल किया जा सके।
पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि सहारनपुर से पकड़े गए नईम ने ही फराज का परिचय पाकिस्तानी हैंडलर्स से कराया था। इसके बाद इस पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों के पासपोर्ट बनवाने का काम भी फराज को सौंपा गया था। इस काम के पीछे का मकसद यह था कि इन युवाओं को प्रशिक्षण के लिए दूसरे देशों में मुजाहिद्दीन के कैंपों में भेजा जा सके। इस योजना के तहत फराज ने खुद का पासपोर्ट भी बनवा लिया था। वह टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से देश के साथ-साथ पाकिस्तान और अन्य देशों के संदिग्ध मुजाहिदों से भी लगातार संपर्क में बना हुआ था।

सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में आरोपियों ने यह भी कबूल किया है कि उनके पाकिस्तानी हैंडलर्स उन्हें इंडियन मुजाहिद्दीन की ट्रेनिंग से जुड़े वीडियो भेजते थे। आरोपी युवाओं का ब्रेनवॉश करने के लिए कहते थे कि उन्हें देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था स्वीकार नहीं है और इसके लिए लड़कों को तैयार किया जा रहा है। उनका मानना था कि इस नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों के पास हथियार होने चाहिए। वे समय आने पर देश की शासन व्यवस्था को उखाड़ फेंकने और अपनी विचारधारा को लागू करने की खतरनाक योजना बना रहे थे।

एटीएस अब इन दोनों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है ताकि देश, विदेश और राज्य में फैले इनके पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही इन्हें मिलने वाली फंडिंग यानी पैसों के लेन-देन के बारे में भी जानकारियां जुटाई जा रही हैं। सुरक्षा एजेंसियां उनके इंटरनेट मीडिया अकाउंट्स, मोबाइल में मिले दस्तावेजों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे किसी और बड़े नेटवर्क या संगठन से तो नहीं जुड़े हैं।


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