19 June 2026
नई दिल्ली।
दुनिया के दो बड़े देशों अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 47 सालों से चली आ रही कड़वाहट और पिछले 107 दिनों से जारी भारी तनाव आखिरकार खत्म होने की राह पर है। दोनों देशों के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस सिलसिले में आज यानी शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के खूबसूरत बागेनस्टॉक रिजॉर्ट में दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने ऐतिहासिक शांति वार्ता शुरू होने जा रही है।
कैसे हुए हस्ताक्षर और कौन बना गवाह
भारतीय समयानुसार गुरुवार तड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ डिनर के दौरान इस 14 सूत्रीय प्रारंभिक समझौता मसौदे (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। ठीक इसी समय तेहरान में मौजूद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी इस समझौते पर वर्चुअल रूप से दस्तखत किए। इस पूरे समझौते में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने मध्यस्थ और गारंटर की भूमिका निभाई और उन्होंने भी इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए हैं।
पहले यह आमने-सामने की हस्ताक्षर प्रक्रिया शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में ही होनी थी, लेकिन इसे पहले ही वर्चुअल रूप से पूरा कर लिया गया। स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, आज होने वाली इस बैठक में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के साथ-साथ मध्यस्थ के तौर पर पाकिस्तान और कतर के बड़े अधिकारी भी शामिल रहेंगे। खास बात यह है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामनेई ने भी इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी कुछ व्यक्तिगत आपत्तियां जरूर थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने देश के हित में इस शुरुआती समझौते को हरी झंडी दी है।
समझौते की बड़ी बातें और शर्तें
इस 14 बिंदुओं वाले शुरुआती समझौते में सबसे महत्वपूर्ण बात 60 दिनों का युद्धविराम है। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि अगले दो महीनों तक कोई सैन्य टकराव नहीं होगा। इसी 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम, वहां मौजूद संवर्धित यूरेनियम और दोनों देशों के बीच चल रहे अन्य सभी विवादित मुद्दों पर बहुत विस्तार से बातचीत की जाएगी।
समझौता लागू होते ही दोनों देशों ने जमीन पर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। समझौते के तहत अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी बड़ा कदम उठाते हुए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले सभी देशों के जहाजों पर लगाई गई पाबंदियों को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिलेगी।
एक दिलचस्प संयोग
इस समझौते के साथ इतिहास का एक बेहद अनोखा संयोग भी जुड़ गया है। जिस फ्रांस के वर्साय पैलेस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते पर दस्तखत किए हैं, ठीक उसी जगह साल 1919 में प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने वाली ऐतिहासिक वर्साय संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। अब पूरे 107 साल बाद उसी ऐतिहासिक जगह पर अमेरिका ने ईरान के साथ शांति समझौते की तरफ एक नया इतिहास लिख दिया है।


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