30 जून 2026:
राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे पर दायर की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग को अस्वीकार कर दिया है l
सोमवार को जस्टिस एमएम सुंदरेष और शील नागू की पीठ के समक्ष वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दाखिल याचिका पर जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया था l अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि, इस मामले को सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा और उसी के अनुसार सुनवाई की जाएगी l याचिका दायर करने वाले की ओर से यह मांग की गई थी कि, मंदिर में आने वाले चढ़ावे, दान और उससे जुड़े प्रबंधन की जांच एक निश्चित समय सीमा के भीतर कराई जाए l इसके साथ ही मंदिर प्रशासन की वित्तीय प्रक्रिया को पहले से ज्यादा पारदर्शी बनाने और डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू करने का भी अनुरोध किया गया था l हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की आवश्यकता नहीं मानी l सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि, मामले को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध होने दिया जाए , और इसमें जल्दबाजी की आवश्यकता नहीं है l
क्या मुद्दे उठाए गए थे याचिका में ?
याचिका में दावा किया गया है कि मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाना चाहिएl इसके लिए कुछ सुझाव भी दिए गए –
*दान और चढ़ावे का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए
*नकद और अन्य स्वरूप के चढ़ावे का स्पष्ट लेखा-जोखा रखा जाए
*ऑडिट और निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाए *प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई जाए
याचिका में यह भी कहा गया है की, तकनीक आधारित सिस्टम से दान प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और भरोसेमंद बनाई जा सकती है l डिजिटल भुगतान और रिकॉर्डिंग से भविष्य में विवाद या भ्रम की संभावना कम हो सकती है l
अदालत ने क्या संकेत दिए? सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर मामले के तथ्यों पर कोई टिप्पणी नहीं की ,और ना ही किसी जांच का आदेश दियाl अदालत का रुख यह रहा कि मामला पहले नियमित सूची में आए और उसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जाए l
अब यह मामला सामान्य प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध होगा l अगली तारीख पर अदालत यह तय कर सकती है कि, याचिका पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं l और आगे कोई निर्देश जारी किए जाएं या नहीं l
फिलहाल अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि तत्काल हस्तक्षेप की बजाय न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार मामले को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दी जाएगी l इस मामले में एक अन्य वकील नरेंद्र कुमार गोस्वामी की ओर से भी एक याचिका दाखिल की गई है l


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