7 सितंबर 2026 देश दुनिया:
ईरान युद्ध से तेल बाजार में हलचल बढ़ गई है । पेट्रोल डीजल की खपत में भी तेजी आई है।  महंगे क्रूड ऑयल से महंगाई की चिंता बढ़ सकती है।  ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के असर अब ग्लोबल ऑयल मार्केट पर साफ दिखाई देने लगा है । जिसकी चिंता भारत के लिए भी बढ़ गई है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।  सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 99 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी और अब इस तनाव के बीच यह जल्दी ही डॉलर को पार कर सकता है । भारतीय क्रूड बास्केट के अलावा और भी कई चीजे हैं । जैसे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में फिर अस्थिरता देखने को मिल रही है।  क्रूड इंपोर्ट और कहीं ना कहीं यह परेशानी भी निश्चित तौर पर उच्चतम स्तर तक पहुंच रही है।
जब से ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हुआ है, तब से हालात ऐसे ही बने हुए थे । भारत ने इसके लिए बड़ी तैयारी कर ली थी।  लेकिन बीच में जिस तरह से चर्चायें चली थी कि  अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू हो जाएगी, माहौल ठीक हो जाएगा, शांति वार्ता भी शुरू हुई।  लेकिन जब ईरान ने स्टेट आफ हार्मुज में नाकाबंदी की, अमेरिका ने भी वहां पर भी नाकाबंदी कर दी । ऐसे में भारत के लिए कहीं ना कहीं यह एक बड़ा झटका हो सकता है।  क्योंकि क्रूड ऑयल बढ़ने से आम आदमी की जेब पर बड़ा बोझ बढ़ सकता है।  और इसका असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाला है।
आने वाले समय में यह एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर उभर सकता है।
क्योंकि यदि महंगाई बढ़ती है तो सरकार के लिए एक बड़ा चैलेंज हो सकता है।
यदि भविष्य में यह लड़ाई लंबी खिंचती है तो हम किस प्रकार से अपना आयात बढ़ा सकते हैं।
अमेरिका में भी क्रूड ऑयल के रेट एकदम से तेजी से बढ़ें थे। इसका असर ऑस्ट्रेलिया और चीन तक भी पहुंच चुका था।
ऐसे में भारत के लिए सचमुच में एक बड़ा चैलेंज है और हमें कई ऑप्शन देखकर चलना पड़ेगा।  हमें कौन से रास्ते चुनने होंगे।  भारत सरकार ऐसी तैयारी काफी समय से कर रही है।  फिलहाल इससे कैसे निपटा जाए।  कहीं ना कहीं यह एक बड़ा चैलेंज सरकार के सामने खड़ा हुआ है।

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