वर्ष 2025 का पहला सूर्य ग्रहण
संवाददाता
29 March 2025
अपडेटेड: 10:09 AM 0thGMT+0530
वर्ष 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च शनिवार के दिन लगने जा रहा है । इस दिन चैत्र मास की अमावस्या है, इसलिए यह शनिचरी अमावस्या भी हैं।
वर्ष 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च शनिवार के दिन लगने जा रहा है । इस दिन चैत्र मास की अमावस्या है, इसलिए यह शनिचरी अमावस्या भी हैं।
ग्रहण एक ऐसी खगोलीय घटना होती है।
जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य एक सीध में होते हैं या चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, तो सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती ।इस स्थिति में सूर्य में आंशिक या पूर्ण रूप से ग्रहण लग जाता है ।
यदि चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेता है तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहते हैं ।अगर वह सूर्य के कुछ हिस्से को ढकता है, तो इसे आंशिक सूर्य ग्रहण कहते हैं ।
यह ग्रहण इसलिए भी बहुत ज्यादा विशेष है, क्योंकि यह सूर्य ग्रहण14 मार्च के चंद्र ग्रहण के ठीक 14 दिन बाद लगने जा रहा है और ऐसा माना जाता है कि अगर 15 दिनों के अंदर दो ग्रहण लगते हैं तो बहुत ही ज्यादा विशेष खगोलीय घटना होती है।
सूर्य ग्रहण 29 मार्च 2025 के दिन चैत्र मास की अमावस्या वाले दिन लग रहा है यह दोपहर 2:21 से शाम 6:16 तक रहेगा ।
साल का यह पहला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा ऐसे में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होता।
हिंदू धर्म में ज्योतिष के अनुसार
ग्रहण के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन भी किया जाता है ।सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल का भी ध्यान रखा जाता है ।
सूतक काल वह अवधि होती है जो सूर्य या चंद्र ग्रहण शुरू होने से पहले आती है ।सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक प्रारंभ हो जाता है। इस प्रकार सूतक और ग्रहण समाप्त होने के साथ ही स्नान के साथ शुद्धिकरण के साथ ही समाप्त होता है ।सूतक काल में और ग्रहण काल में हमें भोजन और जल ग्रहण नहीं करना चाहिए । किंतु सूतक काल मिलाकर यह अवधि बहुत लंबी हो जाती है इसलिए लोग ग्रहण काल को ही विशेष रूप से मानते हैं। इस दौरान
नया कार्य, शुभ कार्य नहीं करना चाहिए ।देवी देवताओं की मूर्तियों को भी नहीं छूना चाहिए। संभव हो तो सोना भी नहीं चाहिए। ग्रहण के दौरान बाहर भी नहीं जाना चाहिए, मंत्रों का जाप करना चाहिए श्रीमद् भागवत गीता ,भागवत का और धार्मिक ग्रंथो का पाठ या अध्ययन करना चाहिए। रसोई में खाने पीने की सभी वस्तुओं में कुशा या तुलसी पत्र रखना चाहिए ।इससे ग्रहण की जो नकारात्मक ऊर्जा होती है इससे यह पत्र हमें बचाते है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से गर्भस्थ शिशु को नुकसान हो सकता है।
गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं जाना चाहिए ।धारदार वस्तुएं चाकू ,कैंची , इसका भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इस दौरान भगवान के पवित्र नाम का ,हरे कृष्णा या महामंत्र विष्णु सहस्त्रनाम, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या महामृत्युंजय या गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए।
मानसिक शांति और सकारात्मक बनाए रखने के लिए मेडिटेशन करना चाहिए।
ग्रहण काल में किए गए मंत्रों पचार का दान से कई गुना अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। यह एक खगोलीय घटना के साथ-साथ इसका आध्यात्मिक रूप से भी इसका महत्व है।
इसमें जप और साधना का विशेष महत्व होता है । अमावस्या तिथि पर हम पितरों के लिए दान और तर्पण करते हैं ।शनिवार का दिन होने से हम पीपल के वृक्ष की पूजा भी कर सकते हैं ।गरीबों को या जरूरतमंद लोगों को दान करते हैं।
तुलसी पत्र अपने पास रख सकते हैं ।जब ग्रहण समाप्त हो जाए तो शुद्धिकरण करके संपूर्ण पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। खाने पीने की वस्तुओं में जो तुलसी दल या कुशा हम रखते हैं ,उसे निकालकर गमले में रख देना चाहिए ।उसके बाद ही भोजन बनाकर ग्रहण करना चाहिये ।
आईये अब जानते हैं कि साल का यह पहला सूर्य ग्रहण किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देगा। यह मुख्य रूप से ऑस्ट्रिया, बेल्जियम ,उत्तरी ब्राजील ,जर्मनी ,फ्रांस ,हंगरी मोरक्को, फिनलैंड, रूस, स्पेन, कनाडा के पूर्वी भाग में पुर्तगाल ,स्विट्जरलैंड इंग्लैंड और अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।