
महावीर जयंती जैन धर्मावलंबियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण त्योहार में से एक है ।महावीर भगवान 24 में और अंतिम तीर्थंकर थे।भगवान महावीर का जन्म का उत्सव 10 अप्रैल गुरुवार को मनाया जा रहा है ।
भगवान महावीर के अनमोल विचार ! शांति और आत्म नियंत्रण अहिंसा है सभी जीवित प्राणियों के प्रति सम्मान का भाव ही अहिंसा है हर जीवित प्राणी के प्रति दया भाव रखना अहिंसा है घृणा का भाव रखने से मनुष्य का विनाश होता है
भगवान महावीर का जन्म एक राजसी परिवार में हुआ था। वे राजा सिद्धार्थ के पुत्र थे ।उनकी माता रानी त्रिशला थी ।उनके जन्म का नाम वर्धमान था ।बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्म की तरफ था 30 साल की उम्र में उन्होंने अपना राजसी जीवन त्याग दिया और तप और ज्ञान का रास्ता चुना ।ऐसा कहा जाता है कि 12 वर्षों तक उन्होंने ध्यान ,अहिंसा, उपवास और मौन का अभ्यास किया और ज्ञान व अनंत ज्ञान प्राप्त कर तीर्थंकर बन गए ।
उन्होंने अपना पूरा जीवन सत्य शांति और करुणा का संदेश फैलाने में व्यतीत किया और फिर मोक्ष प्राप्त किया ।भगवान महावीर की शिक्षाएं जैन दर्शन की नींव का एक हिस्सा है ।उन्होंने लोगों को अहिंसा ,सत्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के मार्ग पर चलना सिखाया ।
महावीर जयंती केवल भगवान महावीर के जन्म का उत्सव नहीं है ।बल्कि इसे शांति, स्थिरता और अतीत की गलतियों पर चिंतन के दिन के रूप में मनाया जाता है। लोग अपनी गलतियों के बारे में सोचते हैं और लोगों से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगते हैं। हम अहिंसा वादी जीवन जीने का प्रयास करते हैं और भगवान महावीर की शिक्षाओं का पालन करते हैं ।

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