यूपी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 की तैयारी शुरू
संवाददाता
11 April 2025
अपडेटेड: 7:29 AM 0thGMT+0530
योगी सरकार ने 8 वर्षों में दो इन्वेस्टर्स समिट की आयोजित
योगी सरकार ने 8 वर्षों में दो इन्वेस्टर्स समिट की आयोजित
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 की तैयारी शुरू कर दी है, जिसका लक्ष्य पिछली समिट के मुकाबले डेढ़ से दोगुना निवेश आकर्षित करना है। योगी सरकार का उद्देश्य 60 से 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त करना है, जिसके लिए नए क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर निवेश का सबसे बड़ा मंच सजेगा। योगी सरकार ने इस वर्ष की आखिरी तिमाही में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के आयोजन की तैयारी शुरू कर दी है। औद्योगिक विकास विभाग एवं इन्वेस्ट उत्तर प्रदेश को इसकी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है। कोशिश यही है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2023 में आए निवेश प्रस्तावों के मुकाबले डेढ़ से दोगुना निवेश प्रस्ताव हासिल किया जाए। वही तब उत्तर प्रदेश को 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी हफ्ते इन्वेस्ट उत्तर प्रदेश के कामकाज की समीक्षा की थी। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने निवेश नीतियों को और सहज बनाने के साथ ही उत्तर प्रदेश की संभावनाओं के विस्तार के लिए अगली इन्वेस्टर्स समिट की तैयारी करने के भी निर्देश दिए। साथ ही इसके लिए देश-दुनिया के उद्योगों, निवेशकों से संपर्क-संवाद की संभावनाओं को तलाशने पर काम शुरू किया जाएगा।
योगी सरकार ने 8 वर्षों में दो इन्वेस्टर्स समिट आयोजित की हैं। पहली समिट में 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रस्ताव मिले थे। वहीं, दो वर्ष पहले हुई दूसरी समिट में इसके 10 गुना यानी 40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव आए थे। दोनों ही आयोजन उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिवेश के विस्तार के लिहाज से काफी सफल रहे थे। एक वरिष्ठ अधिकारी का मानना है कि प्रदेश का लक्ष्य एक ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनना है। इन्वेस्टमेंट इसमें अहम भूमिका निभाएगा। उत्तर प्रदेश को मेगा लक्ष्य हासिल करने के लिए 100 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश की जरूरत है। इस वर्ष के आखिर तक इसका एक-तिहाई निवेश जमीन पर उतारने पर नजर है। वही आम तौर पर अगर किसी इन्वेस्टर्स समिट में आए एक-तिहाई प्रस्ताव जमीनी शक्ल लें तो इसे अच्छी सफलता माना जाता है। उत्तर प्रदेश में यह दर 38% से ज्यादा है। साथ ही इसे और बढ़ाने पर फोकस है। इसलिए, अगली जेआईएस में हमारी कोशिश 60 से 80 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्रदेश में लाने पर है। इसके लिए नए सेक्टर्स के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
सरकार की कवायद केवल निवेश के मेगा इवेंट पर ही नहीं बल्कि उसको जमीन पर उतारने की है। 2018 में हुए इन्वेस्टर्स समिट के 46% से ज्यादा प्रस्ताव तीन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के जरिए हकीकत की शक्ल ले चुके हैं। वहीं, जीआईएस -23 में आए प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए भी एक ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी हो चुकी है जिसे GBC-4 नाम दिया गया था। इसमें 10 लाख करोड़ से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतरे थे, जिसमें 3 लाख करोड़ रुपये का कमर्शल प्रॉडक्शन भी शुरू हो चुका है। अगली जेआईएस के पहले कुछ और एमओयू को मूर्त रूप दिया जाएगा। सूत्रों का मानना है कि 3 लाख रुपये करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी भी जेआईएस के पहले की जाएगी। इस तरह 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश धरातल पर उतर चुका होगा।