आंध्र प्रदेश में SC आरक्षण में सब-कोटा लागू

khabar pradhan

संवाददाता

18 April 2025

अपडेटेड: 9:21 AM 0thGMT+0530

आंध्र प्रदेश में SC आरक्षण में सब-कोटा लागू

तेलंगाना और हरियाणा के बाद अध्यादेश जारी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

तेलंगाना और हरियाणा के बाद अध्यादेश जारी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर

आंध्र प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण के भीतर सब-कोटा लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण अध्यादेश जारी किया है। यह कदम तेलंगाना और हरियाणा के बाद लिया गया है, जहां हाल ही में इसी तरह के उप-वर्गीकरण लागू किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने राज्यों को अनुसूचित जातियों के बीच आरक्षण को उप-वर्गीकृत करने की अनुमति दी थी, जिसके बाद आंध्र प्रदेश ने यह कदम उठाया। इस अध्यादेश ने राज्य में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं को गति दे दी है।
अध्यादेश का विवरण
आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने अध्यादेश के तहत अनुसूचित जातियों की 59 जातियों को तीन समूहों में विभाजित किया है। इस वर्गीकरण के तहत 12 जातियों को केवल 1% आरक्षण का लाभ मिलेगा, जबकि अन्य समूहों को उनके जनसंख्या अनुपात और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के आधार पर अधिक हिस्सेदारी दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य उन अनुसूचित जातियों को अधिक अवसर प्रदान करना है, जो अब तक आरक्षण के लाभ से वंचित रही हैं।


सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2024 में एक ऐतिहासिक फैसले में राज्यों को अनुसूचित जातियों के बीच आरक्षण को उप-वर्गीकृत करने की शक्ति दी थी। कोर्ट ने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय को और मजबूत करेगा, बशर्ते यह डेटा और तर्कसंगत आधार पर किया जाए। इस फैसले ने राज्यों को उन समुदायों की पहचान करने का अधिकार दिया, जो आरक्षण के लाभ से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुए हैं। आंध्र प्रदेश का यह अध्यादेश इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
सरकार का तर्क
आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि यह अध्यादेश सामाजिक समावेश और समानता को बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “हमारा मकसद उन समुदायों को मुख्यधारा में लाना है, जो लंबे समय से उपेक्षित रहे हैं। यह अध्यादेश सामाजिक न्याय के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” सरकार ने दावा किया कि इस उप-वर्गीकरण के लिए व्यापक सर्वे और डेटा विश्लेषण किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो कि कोई भी समुदाय अन्याय का शिकार न हो।
विपक्ष का विरोध
इस अध्यादेश का कुछ विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने विरोध किया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि 12 जातियों को केवल 1% आरक्षण देना उनके साथ भेदभाव है। कुछ संगठनों ने इसे “वोट बैंक की राजनीति” करार दिया और मांग की कि सभी अनुसूचित जातियों को समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने इस अध्यादेश को जल्दबाजी में लागू किया, बिना सभी हितधारकों से उचित विचार-विमर्श किए।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
इस अध्यादेश ने आंध्र प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक बहस छेड़ दी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम उन अनुसूचित जातियों के बीच समानता लाने में मदद करेगा, जो अब तक आरक्षण के लाभ से वंचित रही हैं। हालांकि, कुछ अन्य का कहना है कि यह कदम सामाजिक तनाव को बढ़ा सकता है, खासकर उन समुदायों में जो कम हिस्सेदारी से असंतुष्ट हैं।
तेलंगाना और हरियाणा का उदाहरण
आंध्र प्रदेश से पहले तेलंगाना और हरियाणा ने भी अनुसूचित जातियों के लिए सब-कोटा लागू किया था। तेलंगाना ने अपनी अनुसूचित जातियों को चार समूहों में बांटा, जबकि हरियाणा ने दो समूह बनाए। इन राज्यों के अनुभवों से प्रेरित होकर आंध्र प्रदेश ने भी अपने मॉडल को लागू किया है। हालांकि, इन राज्यों में भी इस नीति को लेकर विरोध और कानूनी चुनौतियां देखने को मिली हैं।
आगे की राह
आंध्र प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अध्यादेश केवल एक शुरुआत है और भविष्य में इसे और बेहतर करने के लिए डेटा और फीडबैक के आधार पर संशोधन किए जाएंगे। सरकार ने यह भी कहा कि वह इस नीति के कार्यान्वयन पर नजर रखेगी ताकि यह सुनिश्चित हो कि इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद समुदायों तक पहुंचे।

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