जापानी महिला अधिकारी से यौन उत्पीड़न का मामला
संवाददाता
18 April 2025
अपडेटेड: 9:25 AM 0thGMT+0530
JNU प्रोफेसर स्वर्ण सिंह बर्खास्त, पहले भी कई शिकायतों का सामना
JNU प्रोफेसर स्वर्ण सिंह बर्खास्त, पहले भी कई शिकायतों का सामना
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने जापानी दूतावास की एक महिला अधिकारी के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में प्रोफेसर स्वर्ण सिंह को बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई जापानी दूतावास द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन को की गई औपचारिक शिकायत के बाद की गई। इस घटना ने न केवल JNU, बल्कि देशभर में व्यापक चर्चा और आक्रोश पैदा कर दिया है। प्रोफेसर स्वर्ण सिंह पर पहले भी यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ से संबंधित कई शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं, जिसके बावजूद उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई अब तक नहीं हुई थी।
मामले का विवरण
जापानी दूतावास ने JNU प्रशासन को एक पत्र लिखकर प्रोफेसर स्वर्ण सिंह के खिलाफ यौन दुराचार की शिकायत दर्ज की थी। शिकायत में कहा गया कि स्वर्ण सिंह ने दूतावास की एक महिला रिसर्चर के साथ अनुचित व्यवहार किया और उसका यौन उत्पीड़न किया। महिला ने अपने आरोपों के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य सबूत भी पेश किए, जो इस मामले में निर्णायक साबित हुए।
JNU प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद तुरंत जांच शुरू की। विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) ने मामले की गहन जांच की और प्रोफेसर स्वर्ण सिंह को दोषी पाया। जांच के निष्कर्षों के आधार पर, JNU ने 17 अप्रैल 2025 को स्वर्ण सिंह को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने का निर्णय लिया। विश्वविद्यालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “JNU यौन उत्पीड़न के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाता है। इस मामले में सभी सबूतों की जांच के बाद दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है।”
पहले भी विवादों में रहे स्वर्ण सिंह
प्रोफेसर स्वर्ण सिंह, जो JNU के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज में पढ़ाते थे, पहले भी कई बार यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों का सामना कर चुके हैं। विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों ने उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज की थीं, जिनमें अनुचित टिप्पणियां करने और असहज व्यवहार करने जैसे आरोप शामिल थे। हालांकि, इन शिकायतों पर पहले कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी, जिसके कारण स्वर्ण सिंह के खिलाफ नाराजगी बढ़ती गई।
छात्र संगठनों और महिला कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर JNU प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि पहले की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो इस तरह की गंभीर घटना को रोका जा सकता था। एक छात्र संगठन के प्रतिनिधि ने कहा, “यह शर्मनाक है कि विश्वविद्यालय ने पहले की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। यह मामला JNU के लिए एक सबक है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई जरूरी है।”
जापानी दूतावास की प्रतिक्रिया
जापानी दूतावास ने JNU के इस कदम का स्वागत किया है। दूतावास ने एक बयान में कहा, “हमारी अधिकारी के साथ हुए इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम पर JNU द्वारा त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।” दूतावास ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में अपनी अधिकारी को पूर्ण समर्थन दे रहा है और कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करेगा।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा की हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इस मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। एक यूजर ने लिखा, “यह शर्मनाक है कि एक प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। JNU को अपनी नीतियों और संस्कृति पर आत्ममंथन करना चाहिए।”
कई राजनीतिक नेताओं ने भी इस घटना की निंदा की है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, “यह घटना न केवल JNU, बल्कि पूरे देश के लिए शर्मिंदगी का विषय है। यौन उत्पीड़न के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” वहीं, अन्य नेताओं ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर निशाना साधा है।
विशेषज्ञों की राय
महिला अधिकारों पर काम करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर करता है। एक महिला अधिकार कार्यकर्ता ने कहा, “शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न की शिकायतों को गंभीरता से लेना जरूरी है। यह मामला दर्शाता है कि सबूतों के साथ मजबूत शिकायत होने पर ही कार्रवाई होती है, जो चिंताजनक है।” उन्होंने यह भी मांग की कि विश्वविद्यालयों में ICC को और सशक्त किया जाए और शिकायतों की सुनवाई में पारदर्शिता बरती जाए।
JNU का रुख
JNU प्रशासन ने इस मामले को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विश्वविद्यालय ने कहा कि वह यौन उत्पीड़न के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएगा। प्रशासन ने यह भी घोषणा की कि वह अपनी यौन उत्पीड़न नीति की समीक्षा करेगा और कर्मचारियों और छात्रों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा।