राणा सांगा विवाद में अखिलेश यादव का बड़ा बयान
संवाददाता
19 April 2025
अपडेटेड: 12:57 PM 0thGMT+0530

सपा सांसद के घर पहुंचे, कहा- मुझे फूलन देवी जैसी हत्या की धमकी
उत्तर प्रदेश की सियासत में राणा सांगा विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार, 19 अप्रैल 2025 को इस मामले में बड़ा बयान दिया। अखिलेश लखनऊ में सपा सांसद और दलित नेता रामजी सुमन के घर पहुंचे, जहां उन्होंने खुलासा किया कि उन्हें फूलन देवी जैसी हत्या की धमकी मिली है। उन्होंने कहा, “मैं रामजी सुमन और दलित समाज के साथ खड़ा हूं। यह विवाद साजिश का हिस्सा है, और हम इसका डटकर मुकाबला करेंगे।” इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है, और विपक्ष ने इसे लेकर योगी सरकार पर हमला बोला है।
राणा सांगा विवाद की पृष्ठभूमि
राणा सांगा विवाद तब शुरू हुआ, जब सपा सांसद रामजी सुमन ने मेवाड़ के महान राजपूत शासक राणा सांगा के बारे में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी को लेकर राजपूत समुदाय में आक्रोश फैल गया, और कई संगठनों ने सुमन के खिलाफ प्रदर्शन किए। लखनऊ और आसपास के इलाकों में तनाव बढ़ गया, जिसके बाद पुलिस ने सुमन के खिलाफ मामला दर्ज किया। सपा ने इस कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया और इसे दलित विरोधी कदम करार दिया।
विवाद के बाद रामजी सुमन ने सफाई दी कि उनकी टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया, और उनका इरादा किसी समुदाय को ठेस पहुंचाने का नहीं था। हालांकि, राजपूत संगठनों ने माफी की मांग की, और कुछ जगहों पर हिंसक प्रदर्शन भी हुए। इस बीच, सपा ने इस मुद्दे को दलित बनाम सवर्ण की सियासत से जोड़कर योगी सरकार पर निशाना साधा।
अखिलेश का सुमन के घर दौरा
शनिवार को अखिलेश यादव ने लखनऊ में रामजी सुमन के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सुमन का समर्थन करते हुए कहा, “रामजी सुमन दलित समाज का एक मजबूत चेहरा हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई एक साजिश है, जिसे कुछ लोग सियासी फायदे के लिए भड़का रहे हैं।” अखिलेश ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें फूलन देवी जैसी हत्या की धमकी मिली है। उन्होंने कहा, “मुझे धमकियां दी जा रही हैं, लेकिन मैं डरने वाला नहीं हूं। सपा दलितों और पिछड़ों के हक के लिए हमेशा लड़ेगी।”
अखिलेश ने योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार राजपूत और दलित समुदायों के बीच तनाव भड़काकर सियासी लाभ लेना चाहती है। उन्होंने मांग की कि सुमन के खिलाफ दर्ज मामले को तुरंत वापस लिया जाए और धमकियों की जांच की जाए।
फूलन देवी का जिक्र और सियासी मायने
अखिलेश के फूलन देवी जैसी हत्या की धमकी के बयान ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है। फूलन देवी, जो एक दलित नेता और सपा की पूर्व सांसद थीं, की 2001 में दिल्ली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अखिलेश का यह जिक्र दलित समुदाय को एकजुट करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सपा इस मुद्दे को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दलित वोटबैंक को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर सकती है।
सपा के अन्य नेताओं ने भी इस मामले में अखिलेश का समर्थन किया। सपा प्रवक्ता ने कहा, “यह BJP की साजिश है, जो दलित नेताओं को निशाना बना रही है। रामजी सुमन के खिलाफ कार्रवाई अन्यायपूर्ण है, और हम इसके खिलाफ सड़क पर उतरेंगे।”
BJP का जवाब और राजपूत संगठनों की मांग
BJP ने अखिलेश के बयान को सियासी नाटक करार दिया। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, “अखिलेश यादव हर मुद्दे को सियासत से जोड़ते हैं। रामजी सुमन की टिप्पणी ने राजपूत समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, और कानून अपना काम कर रहा है। धमकियों का आरोप बेबुनियाद है।”
राजपूत संगठनों ने सुमन से सार्वजनिक माफी की मांग की है। एक संगठन के नेता ने कहा, “राणा सांगा हमारे गौरव हैं। उनकी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम चाहते हैं कि सुमन माफी मांगें और सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई करे।”
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
लखनऊ पुलिस ने इस मामले में तनाव को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रामजी सुमन के घर के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है, और संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। पुलिस ने अखिलेश की धमकी की शिकायत पर भी जांच शुरू की है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। धमकियों के दावे की गंभीरता से पड़ताल की जा रही है, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
सियासी और सामाजिक प्रभाव
राणा सांगा विवाद ने उत्तर प्रदेश में जातिगत सियासत को फिर से हवा दे दी है। सपा इसे दलित उत्पीड़न से जोड़कर अपने कोर वोटबैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि BJP इसे कानून-व्यवस्था का मामला बताकर राजपूत समुदाय को साधने की कोशिश में है। इस विवाद ने दलित और राजपूत समुदायों के बीच तनाव को बढ़ाया है, जिसके दूरगामी सियासी परिणाम हो सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश का सुमन के समर्थन में खुलकर सामने आना और धमकियों का जिक्र सपा की रणनीति का हिस्सा है। यह कदम न केवल दलित वोटरों को एकजुट कर सकता है, बल्कि BJP पर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाकर विपक्ष को एकजुट करने में भी मदद कर सकता है।
आगे क्या?
यह विवाद जल्द सुलझने के आसार कम दिख रहे हैं। सपा ने इस मुद्दे पर आंदोलन की चेतावनी दी है, जबकि राजपूत संगठन सुमन के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। अखिलेश की धमकी की जांच और सुमन के खिलाफ दर्ज मामले का नतीजा इस विवाद को नया रंग दे सकता है।
फिलहाल, उत्तर प्रदेश की सियासत में यह मामला गरमाया हुआ है, और दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद सियासी समीकरणों को कैसे प्रभावित करता है और क्या यह सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाएगा।