जानवरों से इंसानों में फैली नई बीमारी

khabar pradhan

संवाददाता

19 April 2025

अपडेटेड: 1:02 PM 0thGMT+0530

मेक्सिको में स्क्रूवर्म मायियासिस का पहला मामला

क्या यह अगली महामारी का संकेत?

दुनिया एक बार फिर जूनोटिक बीमारी (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारी) के खतरे से जूझ रही है। मेक्सिको में हाल ही में स्क्रूवर्म मायियासिस (Screwworm Myiasis) का पहला मानव मामला सामने आया है, जो अब तक मुख्य रूप से जानवरों को प्रभावित करने वाली बीमारी थी। यह खबर वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि ऐसी बीमारियां अतीत में महामारी का रूप ले चुकी हैं। क्या यह नई बीमारी अगली वैश्विक महामारी का कारण बन सकती है? आइए, इस बीमारी और इसके संभावित खतरों को विस्तार से समझें।
स्क्रूवर्म मायियासिस क्या है?
स्क्रूवर्म मायियासिस एक परजीवी संक्रमण है, जो न्यू वर्ल्ड स्क्रूवर्म मक्खी (Cochliomyia hominivorax) के लार्वा के कारण होता है। यह मक्खी आमतौर पर गर्म और उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती है और ज्यादातर मवेशियों, भेड़-बकरियों और अन्य जानवरों को संक्रमित करती है। मक्खी जीवित ऊतकों, विशेष रूप से खुले घावों में अंडे देती है, और इन अंडों से निकलने वाले लार्वा मांस को खाना शुरू कर देते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण और दर्द होता है।
हालांकि यह बीमारी जानवरों में आम है, लेकिन इंसानों में इसका संक्रमण दुर्लभ माना जाता है। मेक्सिको में सामने आए इस पहले मानव मामले ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चौंका दिया है, क्योंकि यह बीमारी इंसानों में तेजी से फैलने की क्षमता रख सकती है, खासकर अगर स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाएं अपर्याप्त हों।
मेक्सिको में पहला मामला: क्या हुआ?
मेक्सिको के एक ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति में स्क्रूवर्म मायियासिस का पहला मामला दर्ज किया गया। मरीज को खुले घाव में गंभीर संक्रमण की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां जांच में स्क्रूवर्म मक्खी के लार्वा पाए गए। डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी और एंटीबायोटिक्स के जरिए मरीज का इलाज शुरू किया, और उसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज का संपर्क जानवरों से था, जिसके कारण संभवतः यह संक्रमण हुआ। हालांकि, यह मामला चिंताजनक इसलिए है, क्योंकि स्क्रूवर्म मक्खी के लार्वा इंसानों में इतने गंभीर रूप से फैलने की घटना पहले बहुत कम देखी गई है। मेक्सिको के स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रभावित क्षेत्र में सर्वेक्षण शुरू कर दिया है और लोगों को खुले घावों की देखभाल और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
क्या यह अगली महामारी बन सकती है?
स्क्रूवर्म मायियासिस के मानव मामले ने वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है, क्योंकि जूनोटिक बीमारियां (जैसे कोविड-19 और स्वाइन फ्लू) अतीत में महामारी का कारण बन चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी के महामारी बनने की संभावना को कई कारक प्रभावित करते हैं:
संक्रामकता: स्क्रूवर्म मायियासिस अभी तक इंसान से इंसान में फैलने वाली बीमारी नहीं है। यह मुख्य रूप से मक्खी के अंडों के जरिए फैलती है। हालांकि, अगर मक्खी की आबादी अनियंत्रित हो और मानव संपर्क बढ़े, तो मामले बढ़ सकते हैं।
स्वच्छता और चिकित्सा: गरीब और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाएं सीमित हैं, यह बीमारी तेजी से फैल सकती है। मेक्सिको जैसे देशों में कुछ क्षेत्रों में ये समस्याएं मौजूद हैं।
जलवायु परिवर्तन: ग्लोबल वार्मिंग के कारण स्क्रूवर्म मक्खी जैसे परजीवियों का प्रसार नए क्षेत्रों में हो रहा है। गर्म और आर्द्र जलवायु इन मक्खियों के लिए अनुकूल है, जिससे उत्तरी अमेरिका और अन्य क्षेत्रों में खतरा बढ़ सकता है।
पशु व्यापार: वैश्विक पशु व्यापार इस बीमारी के प्रसार को बढ़ा सकता है। अगर संक्रमित जानवरों को एक देश से दूसरे देश में ले जाया जाए, तो मक्खी का प्रसार तेज हो सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तुरंत कदम उठाए जाएं, तो इसे महामारी बनने से रोका जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने मेक्सिको के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मिलकर निगरानी शुरू कर दी है।
इतिहास में स्क्रूवर्म का प्रभाव
स्क्रूवर्म मक्खी ने अतीत में पशुधन उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया है। 20वीं सदी में अमेरिका और मध्य अमेरिका में इस मक्खी ने मवेशियों को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया था, जिससे लाखों डॉलर का नुकसान हुआ। 1950 के दशक में अमेरिका ने एक अभिनव ‘स्टराइल इंसेक्ट टेक्नीक’ (SIT) का इस्तेमाल कर इस मक्खी को उत्तरी अमेरिका से लगभग खत्म कर दिया था। इस तकनीक में नर मक्खियों को बंध्याकरण कर छोड़ा जाता है, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है।
हालांकि, मध्य और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में यह मक्खी अभी भी मौजूद है, और मेक्सिको का ताजा मामला दिखाता है कि यह खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
रोकथाम के लिए उठाए जा रहे कदम
मेक्सिको और पड़ोसी देशों ने इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए हैं:
निगरानी और जागरूकता: प्रभावित क्षेत्रों में मक्खी की आबादी और मानव मामलों की निगरानी की जा रही है। लोगों को खुले घावों को ढकने और स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
कीटनाशक और स्टराइल तकनीक: मक्खी की आबादी को कम करने के लिए कीटनाशकों का छिड़काव और स्टराइल इंसेक्ट टेक्नीक का उपयोग शुरू किया गया है।
चिकित्सा सुविधाएं: अस्पतालों को स्क्रूवर्म मायियासिस के इलाज के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिसमें सर्जरी और एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग: WHO और CDC मेक्सिको के साथ मिलकर इस बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए रणनीति बना रहे हैं।
भारत के लिए क्या है सबक?
हालांकि यह बीमारी अभी भारत में नहीं देखी गई है, लेकिन जूनोटिक बीमारियों का खतरा वैश्विक है। भारत में पशुधन और ग्रामीण आबादी की बड़ी संख्या को देखते हुए, ऐसी बीमारियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। कुछ सुझाव इस प्रकार हैं:
पशु स्वास्थ्य निगरानी: पशुधन की नियमित जांच और परजीवी नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किए जाएं।
स्वच्छता और जागरूकता: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और घाव प्रबंधन के बारे में जागरूकता फैलाई जाए।
अंतरराष्ट्रीय निगरानी: वैश्विक पशु व्यापार और यात्रा पर नजर रखी जाए, ताकि ऐसी बीमारियां भारत में प्रवेश न करें।
चिकित्सा तैयारी: अस्पतालों को जूनोटिक बीमारियों के इलाज के लिए प्रशिक्षित किया जाए।
क्या यह महामारी बनेगी?
फिलहाल, स्क्रूवर्म मायियासिस के महामारी बनने की संभावना कम है, क्योंकि यह इंसान से इंसान में नहीं फैलती। हालांकि, अगर मक्खी की आबादी और मानव संपर्क अनियंत्रित रहा, तो यह स्थानीय स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि तुरंत और समन्वित कार्रवाई से इस खतरे को रोका जा सकता है।
यह मामला एक बार फिर जूनोटिक बीमारियों के प्रति वैश्विक सतर्कता की जरूरत को रेखांकित करता है। मेक्सिको का यह पहला मामला चेतावनी है कि प्रकृति के साथ असंतुलन और जलवायु परिवर्तन हमें नई चुनौतियों की ओर ले जा सकते हैं।

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